स्वयं प्रकट हनुमान मंदिर सूरत। चमत्कारी हनुमान मंदिर। Svayam Pragat Hanuman Mandir Gujarat। दर्शन
Tilak
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जय श्री राम, जय हनुमान !!! आप सभी का हमारे कार्यक्रम दर्शन में हार्दिक अभिनन्दन. देश में कई स्थान ऐसे हैं जहाँ से स्वयं प्रकट भगवान के विग्रह मिले हैं, ये विग्रह सामान्य नहीं होते इनकी ऊर्जा शक्ति सामान्य विग्रहो की अपेक्षा विशेष है , हमारे देश में कलयुग के प्रकट देवता श्री हनुमान जी महाराज का भी एक स्वयं प्रकट मंदिर है , जी हाँ इस मंदिर में स्थित हनुमान जी स्वयं प्रकट हैं, तो आइये दर्शन करते हैं ऐसे संकट हरण मंगल करण भगवान श्री स्वयं प्रकट हनुमान मंदिर में विराजित हनुमान जी के।
मंदिर के बारे में:
यह मंदिर गुजरात में सूरत जिले से लगभग २८ किलोमीटर की दुरी पर कपासी गाँव में स्थित हैं. ये देश में एक मात्र मंदिर हैं जहाँ के हनुमान जी स्वयं भू प्रकट हैं, हनुमान जी यहाँ संकट हरण मंगल करण स्वरुप में हैं जो भक्तो के समस्त संकटो नाश करते हैं और मनवांछित फल प्रदान करते हैं।
मंदिर का इतिहास
मंदिर से जुड़े इतिहास के सम्बन्ध में कहा जाता है की त्रेता युग में जब प्रभु श्री राम जी यहाँ सिद्धनाथ महादेव की प्रसन्नता के लिए यज्ञ कर रहे थे तो हनुमान जी यहाँ नरिया जंगल के बीच टिकरा के ऊपर से यज्ञ मंडप की सुरक्षा स्वयं कर रहे थे, कहा जाता है की उस समय जंगल में राक्षसों का बहुत आतंक हुआ करता था, हनुमान जी इसलिए यहाँ ऊपर विराजे थे की यहाँ से यज्ञ मंडप पर दृष्टि रहे और राक्षसों के द्वारा यज्ञ में कोई विघ्न न हो, मान्यता है की त्रेता के वो हनुमान जी कलयुग में स्वयं भू प्रकट शिला के रूप में यहाँ विराजमान हैं, और यहाँ आने वाले साधु -संतो, भक्तो की रक्षा तो करते ही हैं साथ ही उनकी मनोकामना भी पूर्ण करते हैं।
कहा जाता है कि जब प्रभु श्री राम जी यहाँ सिद्धनाथ महादेव को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ करने का विचार कर रहे थे तो उन्होंने हनुमान जी को आस-पास से कुछ ऋषि मुनियों को यज्ञ में उपस्थित होने का आग्रह करने के लिए भेजा , परन्तु ऋषि मुनियो ने मना कर दिया की हम सिद्धनाथ क्षेत्र में नहीं जा सकते क्यूंकि वहां जल-पान और स्नान के लिए मीठा जल नहीं है, तब श्री राम जी ने अपने बाण से एक मीठे जल के कुंड का निर्माण किया जो आज राम कुंड के नाम से जाना जाता है ये कुंड ठीक सिद्धनाथ मंदिर के पास स्थित है, कुंड के निर्माण के बाद ऋषि-मुनि यज्ञ में उपस्थित हुए और यज्ञ की रक्षा की श्री हनुमान जी ने।
Disclaimer: यहाँ मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहाँ यह बताना जरूरी है कि तिलक किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
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