बावरो रावरो नाह भवानी 005
भजन कुसुमाञ्जलि | Bhajan Kusumanjali
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बावरो रावरो नाह भवानी 005
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भजन कुसुमाञ्जलि | Bhajan Kusumanjali
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बावरो रावरो नाह भवानी ।
दानि बडो दिन दये बिनु, बेद-बड़ाई भानी ।।
बावरो रावरो नाह भवानी ।
निज घरकी बरबात बिलाकहु, हौ तुम परम सयानी ।
सिवकी दई संपदा देखत, श्री-सारदा सिहानी ।।
बावरो रावरो नाह भवानी ।
जिनके भाल लिखी लिपि मेरी, सुखकी नहीं निसानी ।
तिन रंकनकौ नाक सँवारत, हौं आयो नकबानी ।।
बावरो रावरो नाह भवानी ।
दुख-दीनता दुखी इनके दुख, जाचकता अकुलानी ।
यह अधिकार सौंपिये औरहिं, भाीख भली मैं जानी ।।
बावरो रावरो नाह भवानी ।
प्रेम-प्रसंसा-बिनय-ब्यंगजुत, सुति बिधिकी बर बानी ।
तुलसी मुदित महेस मनहिं मन, जगतु-मातु मुसकानी ।।
बावरो रावरो नाह भवानी ।