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अच्छा चरवाहा मैं हूँ | यीशु मसीह का महान प्रेम | यूहन्ना 10:11-21 | #अच्छाचरवाहा #यीशुमसीह

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अच्छा चरवाहा मैं हूँ | यीशु मसीह का महान प्रेम | यूहन्ना 10:11-21 | #अच्छाचरवाहा #यीशुमसीह

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अच्छा चरवाहा मैं हूँ | यीशु मसीह का महान प्रेम | यूहन्ना 10:11-21 | #अच्छाचरवाहा #यीशुमसीह #यूहन्ना10 #बाइबलसंदेश #हिंदीप्रचार #HindiBibleMessage #GoodShepherd #JesusChrist #BibleTeaching #HindiChristianSermon #प्रभुयीशु #परमेश्वरकावचन #ChristianYouTube #BibleStudy #HindiChristianity John 10:11-21 11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। 12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है। 13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उस को भेड़ों की चिन्ता नहीं। 14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं। 15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं। 16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा। 17 पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं। 18 कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है॥ 19 इन बातों के कारण यहूदियों में फिर फूट पड़ी। 20 उन में से बहुतेरे कहने लगे, कि उस में दुष्टात्मा है, और वह पागल है; उस की क्यों सुनते हो? 21 औरों ने कहा, ये बातें ऐसे मनुष्य की नहीं जिस में दुष्टात्मा हो: क्या दुष्टात्मा अन्धों की आंखे खोल सकती है?