Перейти к содержимому

अदेखा को देखकर देखना है या नही #nirankari#viral#trending #viralvideo

Recycle

0:00 / 0:00

अदेखा को देखकर देखना है या नही #nirankari#viral#trending #viralvideo

14 просмотров · 12 дней назад
Recycle
157 подписчиков
14 просмотров · 12 дней назад
प्रियतम प्रेम से कहना धनकारी परमात्मा अनंत है। और अनंत तिस को जानने के रास्ते हैं। लेकिन सबसे कठिन रास्ता हमारे साथ गुरु माता जी बता रहे हैं क्योंकि सरल होना सबसे ज्यादा कठिन है। परमात्मा इतना सरल है कितना सरल हुआ नहीं जा सकता है कितना नजदीक है, नजदीक से भी नजदीक है, इसलिए इसे देखा नहीं जा सकता। इसलिए यह कठिन है। इस मुल्क में परमात्मा से बचने की जगह कहाँ ह और ऐसा थोड़ी है। परमात्मा उत्तर में है, दक्षिण में नहीं, पूरम में है, पश्चिम में नहीं, ऊपर है, नीचे नहीं। परमात्मा ने तो सभी कुछ घेरा है चलो तोष में, बैठो तोस में, सौ तोस में, उड़ने भी वही है, बिछौने भी वही है। करोगे क्या खाओ तो उसे, पियो, तो उसे, स्वास, ल तो उसके उपाय कहाँ है। परमात्मा से बचने का जगह कहाँ है? और तुम सभी जगह हो, सागर तुम्हारा, मिटटी, तुम्हारे, आकाश, तुम्हारा सब तुम्हारा है। ध्यान रखना, परमात्मा निराकार है। तो इसका अर्थ यही हुआ कि सभी कार उसके हैं। इसलिए सदगुरु माता जी कह रही हैं कि परमात्मा साकार भी है, निराकार भी है। फिर ऐसा क्यों कहना पड़ा कि 1 को जानो, 1 को मानव, 1 हो जाएगा मैं कहता हूँ, किसी को भी मानो, हर मानने में 1 ही परमात्मा को मान सकते हो। करोगे क्या, पूजा, पीपल को की, पहाड़ को, चरण, उसी के पाओगे, वहीं सिर झुकेगा, उसके अतिरिक्त कुछ है ही नहीं। मैं कहता हूँ, कहीं भी चढ़ाओ, पूजा के फूल, फूल भी उसी के हैं, चरण भी उसी के हैं, चढ़ाने वाला भी उसी का है इसलिए मैं तुम्हें संकरण नहीं बनाता हूँ। मैं नहीं कहता हूँ कि सिर्फ 1 को छोड़कर किसी को मत मानो। मैं तुम से कहता हूँ कि तुम किसी को भी मानो 1 ही माना जाएगा। कहीं भी सिर झुकाओ, किसी भी दिशा में सिर झुकाओ, अंतता तुम पाओगे हुआ ही पूजा गया। मंदिर में, पूजा की मस्जिद में, राम में के, कृष्ण बुद्ध में की महावीर में, वही पूजा जाएगा इस जगत के 1 कण का भी इनकार परमात्मा का इनकार है, 1 विचार का इनकार, 1 भाव का इनकार, 1 वृत्ति का इनकार, 1 दैत्य का इनकार, 1 देवता का इनकार परमात्मा का इनकार है। और शाहरुख का विकार, परमात्मा का हिस्सा विकार है। और निरंकारी महात्मा नकार में किए जा रहे हैं। तो जो भगवान का भी सहारा छोड़ देता है, वही भगवान है जो अस्तित्व का भी सहारा छोड़ देता है, वही अस्तित्व है। सद्गुरु माता जी, जो आपको ब्रह्म ज्ञान देते है, तो आप परमात्मा हो गए हो। यदि अभी भी परमात्मा का सहारा मांग रहे हो, सहारा ले रहे हो, तो तुम्हें ज्ञान नहीं मिला है। तुम्हें ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई है। क्योंकि जाना तुम ही तुम ही हो जाए। तो अभी तुम परमात्मा नहीं हुए हो। क्योंकि अभी भी भाव है। सहारे के प्रार्थना के, जीव बन के, साधना करने के बजाय नारायण हो के विश्राम करो। जीव बन के पिता, पुत्र, पति, पत्नी, प्रेमी, प्रेमिका से मोहित होने के वजाय परमात्मा हो के प्रेम करो। सद्गुरु माता होगे, प्रेम करो। याद रहे जीव, कभी भी परमात्मा से नहीं मिलता है। परमात्मा ही परमात्मा से मिलता है। क्योंकि समान समान से मिलता है। आकाश होना है तो आकाश हो के मिलोगे न, देह हो के थोड़ी न मिलेगा पानी होना है तो पानी हो के मिलोगे न, देह हो के थोड़ी न मिलोगे तो परमात्मा से मिलना है तो परमात्मा हो के मिला जा सकता है। दे हो कि नही यदि यह परमात्मा चाहे, यह दातार चाहे, सतगुरु, माता चाहे, तभी तुमसे मिलन हो