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इस जनजाति में दहेज में मिलते हैं कुत्ते और गधे | कालबेलिया की संस्कृति जिसने दुनिया को मोहित किया

RAJESH ZONE

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इस जनजाति में दहेज में मिलते हैं कुत्ते और गधे | कालबेलिया की संस्कृति जिसने दुनिया को मोहित किया

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कालबेलिया समाज को अक्सर “काला” (साँप) + “बेल” (बेल) से जोड़ा जाता है। उनका इतिहास नाग-पूजा और साँप के साथ जुड़ा माना जाता है। वे पारंपरिक रूप से घूमंतू जीवनशैली जीते रहे हैं और जंगलों/पारम्परिक क्षेत्रों में घूमते रहे हैं। कालबेलिया समाज के लोग पहले साँप पकड़ने, साँपों के इलाज, और जंगलों में घूमने का काम करते थे। आजकल उनमें से कई लोग संगीत, नृत्य, हस्तकला, और पर्यटन से जुड़े हैं। उनकी जीवनशैली में परिवार और समुदाय की एकता बहुत महत्वपूर्ण है। कालबेलिया समाज का सांस्कृतिक प्रदर्शन (नृत्य-गीत) राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध लोकनृत्य माना जाता है। कालबेलिया नृत्य में महिलाएँ अपनी घुमावदार पोशाक, गहने और सुरीले संगीत के साथ नृत्य करती हैं, जो साँप के चलने की शैली जैसा दिखता है।