दीपावली विशेष |अवध में राम आए हैं | श्री हित अम्बरीष जी |
Shree Harivansh Pran Dhan Mere
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दीपावली विशेष |अवध में राम आए हैं | श्री हित अम्बरीष जी |
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सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे...
दशरथ के घर इक दिन आए, विश्वामित्र मुनि ज्ञानी।
संग चले ले राम-लखन को, कहते ज्ञान कहानी।
चलते-चलते मिली ताड़का, उसको मार गिराया।
चरणों की ठोकर से शिला को, नारी रूप बनाया।
कि महिमा लखी न जाए रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
धनुष यज्ञ में बैठ गए जा, दशरथ राज दुलारे।
शिव का धनुष टूटे न किसी से, हिम्मत कर सब हारे।
उठे सच्चिदानंद राम तब, शिव का धनुष उठाया।
कर दो टुकड़े शिव धनुष के, जनक का ताप मिटाया।
सिया वरमाला पहनाए रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
दशरथ के महलों में रहती, मंथरा नाम की दासी।
उसी के कारण श्री रघुनंदन, राम बने वनवासी।
संग चले सीता और लक्ष्मण, योगी का वेश बना के।
चलते-चलते ठहर गए वे, गंगा किनारे जा के।
कि केवट नाव न लाए रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
प्रभु बोले, अब देर करो न, पार उतारो भाई।
केवट कहता, डरता हूँ मैं, आज राम रघुराई।
चरणों की ठोकर से शिला को, नारी रूप बनाया।
मेरी तो यह काठ की नैया, छूते ही उड़ जाए।
कि पहले चरण धुलाओ रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
गंगा पार उतरकर रघुवर, देने लगे उतराई।
केवट कहता, लूँगा न मैं, आज राम रघुराई।
मैंने तुमको पार किया है, यह तुम भूल न जाना।
घाट तुम्हारे जब भी आऊँ, मुझको पार लगाना।
कि भव-भंजन मिट जाए रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
पंचवटी में रावण ने फिर, सीता आन चुराई।
राम-राम श्रीराम पुकारे, देती राम दुहाई।
वन-वन डोले श्री रघुनंदन, मन में थे अकुलाते।
सेवक बनकर तब चरणों में, पवनपुत्र फिर आते।
कि लंका खूब जलाई रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
दल-बल के संग लंकापति पर, राम ने करी चढ़ाई।
तीखे शर से रावण मारा, विजय ध्वजा फहराई।
पृथ्वी का सब भार मिटा कर, फिर लौटे रघुराई।
अवधपुरी के नर-नारी ने, मिलकर खुशी मनाई।
कि महिमा लखी न जाए रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं...
सभी मिल मंगल गाओ रे, अवध में राम आए हैं।
सभी मिल मंगल गाओ रे...
जय जय श्रीराम।