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श्री राम राय दरबार || GURUDWARA, DEHRADOON || SHRI RAM RAI DARBAR || NIKHIL JAIN || STUDIO DHARMA ||

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श्री राम राय दरबार || GURUDWARA, DEHRADOON || SHRI RAM RAI DARBAR || NIKHIL JAIN || STUDIO DHARMA ||

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गुरूद्वारा श्री राम राय दरबार देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सिखों का प्रमुख व धार्मिक स्थल मौजूद है। गुरू श्री राम राय गुरूद्वारा। 17वीं सदी में सातवें सिखगुरू श्री हर राय जी के सबसे बड़े बेटे ‘राम राय’ ने यह गुरूद्वारा स्थापित करवाया था। ऐतिहासिक तथ्यों यह बताते हैं कि श्री गुरू राम राय जी ने सन् 1676 में डन (घाटी) में अपना डेरा (शिविर) स्थापित किया। इसके बाद से ही इस जगह का नाम डेरा दून यानि देहरादून हो गया। देहरादून का झंडा मेला काफी प्रचलित भी है। 17 वीं शताब्दी के मध्य में बाबा राम राय अपने अनुयायियों के साथ यहां आकर बस गए, जब उन्हें मुगल बादशाह औरंगजेब के सामने धर्मग्रंथ का गलत अनुवाद करने के लिए सिख रूढ़िवादियों द्वारा भगा दिया गया था, ताकि अपराध का कारण न बने। गुरूद्वारे की खुबसूरती इस तरह से है कि आपको इसकी दीवारों पर देवी-देवताओं, संतों व धार्मिक कथाओं के चित्र दिखाई देंगे। इसके साथ ही यहाँ की कलाकृतियों के साथ-साथ सफेद पत्थर से बनीं ऊँची मीनारें व दीवारें और गोल शिखर के गुंबद में आपको कांगड़ा-गुलेर और मुगल काल की वास्तुकला की झलक भी दिख जाएगी। इस गुरूद्वारे के प्रांगण में एक विशाल तालाब भी है जहां पर दर्शनार्थी प्रेमभाव के साथ आस्था की डूबकी लगाते हैं। इस गुरूद्वारे को लोग धमावाला या झंडा साहिब भी कहते हैं। जब सन् 1687 में श्री गुरु राम राय जी का स्वर्गवास हो गया तो उनकी धर्मपत्नी माता पंजाब कौर ने श्री दरबार साहिब को संभाला। माता पंजाब कौर ने गुरूद्वारे की देखभाल की जिम्मेदारी एक महंत को सोंप दी थी। श्री औद दास जी सन् 1687 में दरबार साहिब के पहले महंत बने थे। वर्तमान श्री महंत देवेंद्र दास जी दरबार साहिब की परंपरा और उसके वर्चस्व को संभालने वाले दसवें महंत हैं। इस गुरूद्वारे में हर रोज लगभग एक हजार लोगों के लिए लंगर प्रसाद आयोजित किया जाता है। इसके साथ ही, श्री गुरू राम राय जी के सानिध्य को ध्यान में रखते हुए एसजीआरआर शिक्षा मिशन (1952 में स्थापित किया गया) भी चलाया जा रहा है। एसजीआरआर शिक्षा मिशन गरीब बच्चों को शिक्षा पहुंचाने का काम कर रहा है। इसके साथ ही श्री गुरू राम राय इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेस् के अंतर्गत साल 2002 में श्री महंत इंद्रेश अस्पताल भी बनवाया गया जिसमें 1000 बेड के साथ मल्टी-स्पैशिलटी व सुपर स्पैशिलटी व्यवस्था उपलब्ध हैं। यहीं नहीं, मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल एंड एलाइड हेल्थ साइंसेज का कॉलेज, पीजी कॉलेज आदि न जाने कितने अनगिनत संस्थान गुरू श्री राम राय जी की कृपा से चलाए जा रहे हैं। इस गुरूद्वारे में हर साल होली के त्योहार के पांच दिन बाद ( इस दिन सिख गुरू श्री राम राय जी का जन्मदिवस) झंडा मेला शुरू होता है जो कि रामनवमी तक चलता है। मान्यता अनुसार, एक सौ फुट लंबे पेडं से प्रतीकात्मक झंडे को कपड़ों से लपेटा जाता है। इस मेले का आनंद लेने के लिए देश-विदेश से सैलानी इकट्ठा होते हैं। इस मेले को मनाने के लिए यहां एकत्रित हुए देश-विदेश के लोगों को "संगत" कहा जाता है। इस मेले के लिए पास के जंगल से लगभग 27 मीटर का एक साल का पेड़ खरीदा जाता है। सौ फीट ऊँचे झंडे को कपड़ों की 61 परतों में लपेटा जाता है, पहली 40 परतें सादे कपड़े की होती हैं और उसके बाद सादे कपड़े की 20 परतें होती हैं और अंतिम परत को "दर्शिनी कपड़ा" कहा जाता है। जिसका एक विशेष धार्मिक अर्थ हैं #nikhilstudiodharma #streetphotography #studiodharma #exploringmeerut #historicsites #arhitecturemarvels #unexploredmeerut #iphonephotography #connectingpastofmeerut #gemsofmeerut #historian #history_explorer #incredibleindia #cityofpast #instaphotography #insta_meerut #ASI #architecturaldigest #antiquephotography #ruinsofmeerut #meerutblogger #incredible_architecture #digital_influencer #shotoniphone #iosphotography