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एंदेर बिंचो अरगी को भइया रे || लोहेरा पेल्लोन एरातो भइया रे || Kudukh Karam Dandi 2026 || मौसमी राग

Tribal Ai Series

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एंदेर बिंचो अरगी को भइया रे || लोहेरा पेल्लोन एरातो भइया रे || Kudukh Karam Dandi 2026 || मौसमी राग

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Kudukh Sadri Karam Dandi #kurukhdandi #karam #jharkhandisong #karamdance #karamsong #tribalculture #jharkhandculture देशवाड़ी खद्दी (सरहुल) त्योहार के बीत जाने पर मान्दर के साथ धुड़िया नाच-गान होता है। सरहुल-पूजा में अच्छी वर्षा के लिए परमेश्वर से वरदान माँगने के बाद अब धान बोने का काम शुरू हो जायेगा। अब कोई-कोई वृष्टि की प्रतीक्षा किये बिना सूखे खेत ही में - धूल में बीज बोने लगते हैं। 'धुड़ियाना' शुरू कर देते हैं। इसीलिए इस समय के नाच-गान को धुड़िया कहा जाता है। गर्मी मौसम के शेष दिनों में भी नाना प्रकार के धुड़िया, नाच-गान होते हैं, जैसे - धुड़िया-टुंटा, धुड़िया-लुझकी, देशवाड़ी, छेछाड़ी आदि। देशवाड़ी ताल : ददंग धींग धतिंग इतंग तंग्तं अतंग ओ० एंदेर बिंचो अरगी को भइया रे । २। खेंसो-खेंसो आरेगा लागी, खेंसो-खेंसो दे। कि० चलाकी बिंचो अरगी को भइया रे । २। खेंसो-खेंसो आरेगा लागी, खेंसो-खेंसो दे। ओ० लोहेरा पेल्लोन एरातो भइया रे । २। इंजो बारा हेलेरआ लागी, इंजो बारागे। कि० झेलेर-फेपेर किचिरीनिम कूरिया । २। इंजो बारा हेलेरआ लागी, इंजो बारागे। ओ० चंपा मूली अँबा कला भइया रे । २। बनाल पेल्लोन डरेका लौचा, बनाल पेल्लोन दे। कि० कला तो को भइया एरा बरा । २। बनाल पेल्लोन डरेका लौचा, बनाल पेल्लोन दे।