Baba Farid, Parinda Aur Aurat Ki Sachi Kahani Baba Sheikh Farid Ji Parinda
Hindu Katha kahani 🕉️
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Baba Farid, Parinda Aur Aurat Ki Sachi Kahani Baba Sheikh Farid Ji Parinda
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Baba Farid, Parinda Aur Aurat Ki Sachi Kahani Baba Sheikh Farid Ji Parinda एक बार की बात है फरीद जी ने सोचा कि वह अपने पीर के दर्शन करके आएंगे उनके दरबार
में जाएंगे यही सोचकर वह अपने दरबार से निकले और जंगलों से होते हुए अपने पीर के
दरबार की ओर जाने लगे चलते-चलते उन्हें दोपहर हो गई बाबा फरीद जी एक पेड़ के नीचे
बैठ गए और अल्लाह को याद करने लगे इतने में एक कुआ उड़ता उड़ता आया और उसी पेड़
की टहनी पर बैठ गया जिसके नीचे फरीद जी बैठे थे वो कवा आकर शोर मचाने लग गया एक
बार बाबा फरीद जी ने उसे देखा और शोर मचा बारहा था दूसरी बार उन्होंने फिर देखा वह
अभी भी शोर मचा रहा था जब तीसरी उन्होंने कौवे की तरफ देखा वह अभी भी शोर
मचाने से पीछे नहीं हट रहा था फिर बाबा फरीद जी ने कहा
कि तू मर क्यों नहीं जाता मैं अपने अल्लाह को याद कर रहा हूं और तू मर क्यों नहीं
जाता बाबा फरीद जी ने इतना ही कहा और वह कौवा तड़पता तड़पता उस टहनी से गिरा और
फरीद जी की आंखों के सामने ही उसने दम तोड़ दिया बाबा फरीद जी अपने पीर को याद
करते रहे और जब इबादत पूरी हुई तो उनकी नजर उस क पर गई और वह सोचने लगे कि फरीद
तूने यह बिल्कुल अच्छा नहीं किया तू अपनी जुबान से अपने पीर को याद कर रहा था और वह
कौवा अपनी जुबान से अपने पीर को याद कर रहा था हम दोनों ही अपनी अपनी जुबान से
अपने पीर को याद कर रहे थे फरीद तूने यह बिल्कुल गलत किया फरीद जी को अपनी गलती का
एहसास हुआ तो उनके हाथ में जो तस्बीह थी वह पकड़ के उन्होंने उस कौवे की घुमाई
अपने पीर को याद किया और कहा अल्लाह केहुकुम से तू जिंदा हो जा इतना ही कहना था
कि देखते ही देखते बाबा फरीद जी के हुकुम से अल्लाह पाक के हुकुम से वह जिंदा हो
गया और उड़कर उसी टहनी पर जाकर बैठ गया उस कौवे को जिंदा करके फरीद जी उस जंगल में
से चलने लगे बाबा फरीद जी ने झांसी जाना था झांसी वहां से 150 किलोमीटर दूर था
बाबा फरीद जी ने अपने मुर्शिद को याद करते हुए चलते रहे धीरे-धीरे वह झांसी पहुंचे
झांसी पहुंचते पहुंचते फरीद जी को बहुत प्यास लगी और उन्होंने पानी पीने के बारे
में सोचा उस शहर में बाहर एक कुआं था और उस समय वहां यह रिवाज बना हुआ था कि जो
कोई काफिर उस कुएं के थोड़ा सा पीछे होकर खड़ा होगा तो लोग समझ लेते थे कि वह
मुसाफिर है उसको प्यास लगी हुई है और बिना कुछ कहे उसे पानी पिला देते थे वहां से
चाहे औरत पानी भरती हो या मर्द दोनों ही पानी पिला सकते थे बाबा फरीद जी को भी इस
बात का पता था तो वह भी कुएं से थोड़ा दूर होकर खड़े हो गए वहां की औरतें पानी भरने
आ जा रही थी पर फरीद जी को किसी ने भी पानी नहीं पूछा धीरे-धीरे सारी औरतें पानी
भर के चली गई और कुएं पर सिर्फ एक ही औरत बची थी जिसने घड़ उठाया रस्सी उठाई और
दोनों को कुएं में डाल दिया उधर बाबा फरीद जी सोच रहे थे कि अगर मैंने इस औरत से
पानी ना मांगा तो यह भी बिना पानी पिलाए चली जाएगी इससे अच्छा है कि मैं अपने आप
ही इससे पानी मांग लूं उन्होंने सोचा कि अगर मैंने पानी ना मांगा तो वह घड़ा और
रस्सी भी ले जाएगी फिर मैं इस कुएं से पानी कैसे निकालू फरीद तू बोल अपनी प्यास
का इजहार कर इस औरत के सामने बाबा फरीद जी अभी सोच ही रहे थे कि उस औरत ने रस्सी
अपने पैरों से दबाई और कहने ने लगी फरीद कितनी औरतें पानी लेकर चली गई पर तुझे
किसी ने पानी नहीं पिलाया पर मैं तुम्हें बिना पानी पिलाए यहां से नहीं जाऊंगी सबर
करो सबर कहीं मेरे साथ वह मत कर देना जो तुमने जंगल में उस कौवे के साथ किया उस
औरत के मुंह से इतनी बात सुनकर फरीद जी हैरान हो गए और सोचने लगे कहां वह जंगल
कहां यह 150 किलोमीटर दूर जगह ना मैं इसको जानता हूं ना यह मुझे जानती है ना ही मैं
पहले कभी इससे मिला इस औरत को मेरा नाम कैसे पता लगा किसने इसको बताया कि यहां
बहुत दूर जंगल में मेरा और कौवे का कोई वाक्य भी हुआ था बाबा फरीद जी की सारी
प्यास दूर हो गई बाबा फरीद जी उस औरत को कहने लगे पानी तो दूर की बात अब मेरी
प्यास दूर हो गई है तू मुझे यह बता तुझे मेरा नाम कहां से पता लगा किसने तुझे जंगल
का वाक्य बताया वो औरत अल्लाह की प्यारी थी फातिमा की कनीज थी अल्लाह की नेक बंदी
थी और वह कहने लगी तेरा वह जंगल वाला वाक्य मैंने घर बैठी ने ही देख लिया था और
तेरा नाम मुझे यहां पानी भरते हुए ही पता लगा था मुझे अल्लाह पाक की ताकतों की वजह
से ही यहां बैठे सब पता लग गया था फरीद जी ने पूछा कि तुझे यह सारी ताकतें कैसे मिली
और उस औरत ने बताया कि फरीद यह मुझे मेरे पति की रजा साधना से मिली है यहां से ही
अल्लाह मेरे पर मेहरबान हुए और उन्होंने