अजपा गायत्री | सोऽहं से हंस मंत्र तक का गूढ़ रहस्य | Lahiri Mahasaya
Antar Samvedna
0:00 / 0:00
अजपा गायत्री | सोऽहं से हंस मंत्र तक का गूढ़ रहस्य | Lahiri Mahasaya
1 331 просмотр · 4 ч назад
Antar Samvedna
19,1 тыс. подписчиков
1 331 просмотр · 4 ч назад
00:00 सुबह से अब तक की श्वासों का अंदाज़ा: आज आपने कितनी बार श्वास ली? 100, 1,000 या 5,000? कमेंट में लिखें
01:54 पटरी के पास वाला घर: जो रोज़ होता है, वह धीरे-धीरे अनसुना हो जाता है
02:28 वह मंत्र जो जन्म से आपके साथ है: अजपा गायत्री, श्वासों में छिपा सोऽहं नाद
03:28 दो तरह के जप, प्रयास से प्रकृति तक: जप बनाम अजपा (जीवो जपति सर्वदा)
03:51 श्वास का विज्ञान (योगशिखा उपनिषद): हकारेण बहिर्याति सकारेण विशेत्पुनः
04:22 21,600: श्वासों का प्राचीन गणित (24 घंटे में 21,600, 1 घंटे में 900, 1 मिनट में 15)
05:07 ब्रह्मांड और श्वास का संयोग: 360 अंश × 60 कलाएँ = 21,600
05:38 21,600 मौके, एक नया नज़रिया: हर अगली श्वास पर भीतर लौटने का दरवाज़ा
06:24 इसे गायत्री क्यों कहा गया? (बृहदारण्यक उपनिषद) प्राणों की रक्षा, सत्य और प्राण (बल)
07:37 गायति च त्रायते च (छांदोग्य उपनिषद): गायत्री गाती भी है और रक्षा भी करती है
09:10 सुनना ही रखवाली है: किसान, पानी की धार और अजपा गायत्री का अभ्यास
10:00 सोऽहं का अर्थ और ध्वनि: सः (वह) + अहम् (मैं) = सोऽहं, योऽसावसौ पुरुषः सोऽहमस्मि (ईशावास्य उपनिषद)
10:37 पाना नहीं, पहचानना है (सोऽयं देवदत्तः): रेलवे स्टेशन पर पुराने दोस्त की पहचान
11:08 दो गायत्रियों का संगम: सुबह का जप और दिन भर चलती अजपा गायत्री
11:59 आज का अभ्यास: श्वास को बदलना नहीं, न गिनती, न लय, न कोई ज़ोर, सिर्फ़ सुनना
12:20 हंस: दूध और पानी का रहस्य, अजपा गायत्री और श्वास का विज्ञान
12:34 नीर-क्षीर विवेक, एक गहरा प्रतीक: सार और निस्सार को अलग करना
13:27 हमारे भीतर का दूध और पानी: विचार, चिंताएँ और साक्षी (The Witness)
14:10 अनसुना मंत्र: सो-हं से हंस तक और उन्मनी अवस्था
14:46 रेल वाले घर का विरोधाभास: सुलभो दुर्लभो जडैः (विज्ञान भैरव तंत्र)
15:48 अटकलें बनाम अनुभव: लाहिड़ी महाशय की सीख, ईश्वर से सीधा संवाद
16:32 श्वास की दिशा या ध्यान की कोमलता? विज्ञान भैरव और योगशिखा में 'स' और 'ह'
17:14 5 मिनट का अभ्यास, बाहर से भीतर की यात्रा: अपनी श्वास को सुनना
18:31 अनसुने मंत्र का स्वागत: अक्षर का जुड़ना, पहचान, धन्यवाद, विश्राम और उत्तम समय
20:06 सीटी वाला पल, दिन भर की अजपा: ट्रैफ़िक जाम में बस 3 श्वासें सुनें
20:32 गृहस्थ की सबसे बड़ी सुविधा: न अलग जगह, न तय समय, आँखें बंद करना भी ज़रूरी नहीं
21:20 आपका प्रयोग: सात दिन की अजपा डायरी
22:19 आपकी गिनती, आपकी गायत्री: 21,600 में से वह श्वास जो आज अनसुनी नहीं रही
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह वीडियो अजपा गायत्री, सोऽहं मंत्र, हंस साधना और श्वास से जुड़े भारतीय योग, वेदांत एवं आध्यात्मिक दर्शन की पारंपरिक अवधारणाओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य इन विषयों को सरल भाषा में समझाना और सहज आत्म-अवलोकन के लिए प्रेरित करना है।
वीडियो में योगशिखा उपनिषद, बृहदारण्यक उपनिषद, छांदोग्य उपनिषद, ईशावास्य उपनिषद, हंस उपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र, भगवद्गीता तथा लाहिड़ी महाशय और क्रिया योग परंपरा से संबंधित संदर्भों का उल्लेख किया गया है। विभिन्न ग्रंथों, भाष्यों और योग-परंपराओं में मंत्रों के उच्चारण, श्वास के क्रम और उनके अर्थों की व्याख्या अलग-अलग हो सकती है। सोऽहं और हंस को स्वाभाविक श्वास से जोड़ना एक पारंपरिक योगिक व्याख्या है; इसे प्रत्येक व्यक्ति की श्वास में किसी मंत्र के शाब्दिक रूप से सुनाई देने का वैज्ञानिक प्रमाण न समझें।
दिन-रात में 21,600 श्वासों का उल्लेख पारंपरिक योगिक गणना के रूप में किया गया है। वास्तविक श्वासों की संख्या व्यक्ति की उम्र, गतिविधि, स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए इस संख्या को व्यक्तिगत श्वासों की निश्चित गणना न मानें।
वीडियो में दिया गया अभ्यास स्वाभाविक श्वास के अवलोकन और मन को सहज रूप से स्थिर करने के लिए है। श्वास को रोकने, उसकी गति बदलने या मंत्र को ज़बरदस्ती जोड़ने की आवश्यकता नहीं है। यदि अभ्यास के दौरान बेचैनी या असहजता महसूस हो, तो रुक जाएँ और सामान्य स्थिति में लौट आएँ। उन्नत क्रिया योग एवं प्राणायाम की विधियाँ योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही सीखें।
अजपा गायत्री के अभ्यास से किसी विशेष आध्यात्मिक अनुभव, मानसिक परिवर्तन या उपलब्धि की गारंटी नहीं दी जाती। यह सामग्री आध्यात्मिक एवं शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है और चिकित्सा या मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सलाह अथवा उपचार का विकल्प नहीं है।
वीडियो में प्रयुक्त कुछ दृश्य AI-assisted artistic tools और digital artwork से निर्मित हो सकते हैं तथा केवल प्रतीकात्मक एवं कलात्मक अभिव्यक्ति हैं।
समस्त भारतीय योग, वेद, उपनिषद एवं ऋषि-परंपरा को सादर प्रणाम।
#lahirimahasaya #kriyayoga #spiritualreflection #antarsamvedna #breathingmeditation #yogapractice #spiritualmeditation #spiritualgrowth