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विवाह बाबा रामदेव जी#runicha dhani #ramadhani #peer baba #alakh dhani #alakh अवतारी #leelo ra asvar

Jai Baba Ree

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विवाह बाबा रामदेव जी#runicha dhani #ramadhani #peer baba #alakh dhani #alakh अवतारी #leelo ra asvar

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Jai Baba Ree
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नेतलदे और बाबा रामदेव जी का विवाह लोकमान्यता के अनुसार बाबा रामदेव जी का विवाह अमरकोट के राजा दलजी सोढा की पुत्री नेतलदे के साथ हुआ था। नेतलदे अत्यंत धर्मपरायण, विनम्र और सद्गुणों से संपन्न राजकुमारी मानी जाती थीं। भक्त परंपरा में उन्हें माता रुक्मणी का अवतार भी कहा जाता है। अमरकोट के राजमहल में उनका पालन-पोषण राजसी वातावरण में हुआ, लेकिन उनके मन में सांसारिक वैभव से अधिक धर्म, भक्ति और ईश्वर के प्रति श्रद्धा थी। जब उनका विवाह बाबा रामदेव जी के साथ निश्चित हुआ, तब अमरकोट में चारों ओर प्रसन्नता का वातावरण छा गया। राजमहल को फूलों, दीपों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया जाने लगा और विवाह की तैयारियां बड़े उत्साह के साथ होने लगीं। लेकिन इस विवाह के साथ नेतलदे के जीवन में एक बड़ी पीड़ा भी जुड़ी हुई थी। लोककथा के अनुसार पक्षाघात के कारण नेतलदे के हाथ-पैरों में ऐसी दुर्बलता आ गई थी कि उनके लिए स्वयं उठना और चलना अत्यंत कठिन हो गया था। राजपरिवार ने उनकी स्थिति को लेकर बहुत चिंता की। राजा दलजी सोढा अपनी पुत्री की अवस्था देखकर व्यथित रहते थे। विवाह का शुभ अवसर निकट आ रहा था, लेकिन नेतलदे स्वयं विवाह की रस्मों में किस प्रकार भाग ले पाएंगी, यह परिवार के लिए चिंता का विषय था। फिर भी सभी ने ईश्वर पर विश्वास रखा और विवाह की तैयारियां जारी रखीं। विवाह का शुभ दिन आया। अमरकोट का राजमहल मंगल गीतों, शहनाई और ढोल-नगाड़ों की ध्वनि से गूंज उठा। दूर-दूर से आए अतिथि और संबंधी विवाह समारोह में सम्मिलित हुए। बाबा रामदेव जी भी विवाह मंडप में पहुंचे। उनका व्यक्तित्व शांत, तेजस्वी और करुणामय था। उनके आगमन से वातावरण में श्रद्धा और भक्ति का भाव भर गया। विवाह मंडप को फूलों की मालाओं से सजाया गया था और बीच में पवित्र अग्नि प्रज्वलित थी। पुरोहित वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर रहे थे और सभी लोग विवाह संस्कार को श्रद्धा से देख रहे थे। विवाह की रस्में विधिपूर्वक आरंभ हुईं। पाणिग्रहण संस्कार के समय बाबा रामदेव जी ने नेतलदे का हाथ अपने हाथ में लिया। लोकमान्यता के अनुसार इसी क्षण नेतलदे के जीवन में अद्भुत परिवर्तन हुआ। रामदेव जी ने उन्हें विश्वास और धैर्य रखने का संदेश दिया। वातावरण में एक गहरी आध्यात्मिक शांति छा गई। परिवार के लोग और विवाह में उपस्थित सभी अतिथि उस क्षण को श्रद्धा और आश्चर्य के साथ देख रहे थे। इसके बाद विवाह के फेरे लेने का समय आया। परंपरा के अनुसार वर-वधू को अग्नि के चारों ओर फेरे लेने थे, लेकिन नेतलदे की शारीरिक अवस्था सभी के सामने थी। वे चलने में असमर्थ थीं। तब लोककथा के अनुसार बाबा रामदेव जी ने उनसे कहा कि वे उठने का प्रयास करें और प्रभु पर विश्वास रखें। नेतलदे ने रामदेव जी के वचन पर विश्वास किया और धीरे-धीरे उठने का प्रयास करने लगीं। पहले उन्होंने अपने शरीर को संभालने का प्रयास किया। वहां उपस्थित लोगों की आंखें उसी दृश्य पर टिक गईं और पूरा मंडप मानो शांत हो गया। कहते हैं कि तभी नेतलदे के शरीर में अचानक नई शक्ति का संचार हुआ। जिस नेतलदे के लिए उठना और चलना कठिन था, वे धीरे-धीरे अपने पैरों पर खड़ी हो गईं। कुछ क्षणों के लिए वहां उपस्थित सभी लोग आश्चर्य में पड़ गए। राजा दलजी सोढा और परिवार के अन्य सदस्यों की आंखों में प्रसन्नता के आंसू आ गए। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि कुछ ही क्षण पहले जो राजकुमारी स्वयं उठने में असमर्थ थी, वह अब अपने पैरों पर खड़ी थी। लोकमान्यता इसे बाबा रामदेव जी की अलौकिक शक्ति और कृपा का परिणाम मानती है। नेतलदे ने बाबा रामदेव जी की ओर श्रद्धा से देखा और फिर विवाह की अग्नि की ओर कदम बढ़ाए। वे रामदेव जी के साथ फेरे लेने लगीं। अग्नि की पवित्र लौ के चारों ओर दोनों ने विवाह की रस्म पूरी की। वहां उपस्थित परिवारजन, रिश्तेदार और अतिथि इस दृश्य को देखकर भाव-विभोर हो उठे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, शहनाई और ढोल-नगाड़ों की ध्वनि गूंजने लगी और विवाह मंडप में चारों ओर प्रसन्नता का वातावरण छा गया। जब नेतलदे ने अपने पैरों पर खड़े होकर बाबा रामदेव जी के साथ फेरे पूरे किए, तब लोगों के हर्ष का पार नहीं रहा। सभी ने हाथ जोड़कर बाबा रामदेव जी का जयघोष किया। चारों ओर एक ही स्वर सुनाई देने लगा—“बाबा रामदेव जी महाराज की जय!” फूलों की वर्षा होने लगी और पूरा राजमहल भक्तिमय वातावरण में डूब गया। राजा दलजी सोढा ने अपनी पुत्री को स्वस्थ अवस्था में देखकर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और विवाह समारोह आनंद तथा उत्सव में बदल गया। इस प्रकार लोकपरंपरा में नेतलदे और बाबा रामदेव जी के विवाह की कथा केवल एक राजसी विवाह की कथा नहीं मानी जाती, बल्कि इसे श्रद्धा, विश्वास और ईश्वर-कृपा की कथा के रूप में भी याद किया जाता है। भक्तों के लिए नेतलदे का विवाह और विवाह के समय उनका उठकर फेरे लेना बाबा रामदेव जी की दिव्य शक्ति और करुणा का प्रतीक है। यही कारण है कि इस प्रसंग का स्मरण आज भी बाबा रामदेव जी के भक्त बड़े श्रद्धाभाव से करते हैं और उनके नाम का जयघोष करते हैं—“बाबा रामदेव जी महाराज की जय!” #ramapir new song rajasthani #ramdev peer maharaj #baba runicha song #ramdev runicha dham #ramapir na new video #ajmal ghar avtar liyo ramapir #ramdevpir short video #runija ramapir na bhajan #ramapir devotional video #ramdevra pilgrimage journey #ramapir devotional song #dev baba yoga #ramdev, #ramdev ji#baba ramdev #ramdev yoga #ramdev live #swami ramdev #baba ramdev ji #ramdev bhajan #ramdev shivir #ramdev empire #ramdev ji yoga #ramdev ji song #ramdev ki video #health9 ramdev #ramdev baba live #baba ramdev song #baba ramdev bike #baba ramdev fake #baba ramdev mafi #ramdev baba yoga #baba ramdev yoga baba ramdev news #yoga guru ramdev #ramdev y #ramdevji bhajan#ramdev ji ka bhajan #ramde