उच्चतम लक्ष्य: जो जीवन से हर अपूर्णता और निर्भरता (Dependency) को मिटा दे!
Sankalpa Vishwa Aikyam Foundation
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उच्चतम लक्ष्य: जो जीवन से हर अपूर्णता और निर्भरता (Dependency) को मिटा दे!
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शरीर के साथ जुड़कर इस प्रकृति के भोगों में आसक्त रहना ही असली अपूर्णता है। इस शरीर को ही अपनी पहचान मान लेना, उसकी स्वाभाविक अपूर्णता को अपनी अपूर्णता मान लेना, और फिर उसे दूर करने के लिए चौबीसों घंटे मानसिक रूप से तत्पर रहना—यही असली अज्ञान है। जब हम खुद को सीमित शरीर मान लेते हैं, तो हमारे विचार और हमारी आसक्ति हर वक्त भोगों में ही फंसी रहती है। हम अपनी मानी हुई आंतरिक अपूर्णता को बाहरी भोगों से भरने की कोशिश करते हैं । अपने अहंकार को पोषण देकर व ख्यालों से सुख लेकर अपनी अपूर्णता को दूर करने का प्रयास करते है। इंद्रियों के विषयों से जुड़कर इस तरह मानसिक रूप से फंस जाना ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा बंधन है। उच्चतम लक्ष्य: उच्चतम लक्ष्य वो है जो हमें इन सब छोटी मानसिक गुलामी से आज़ाद कर दे और हमारे जीवन को इन सब से बाहर निकाले। वह एक ऐसी जीवन क्रांति है जो जीवन में हर पल सिर्फ और सिर्फ अपनी आज़ादी और अपने बंधनों को काटने का चुनाव करे। वह लक्ष्य है—स्वयं को जानना, और उन तमाम बंधनों को काट फेंकना जो हमारे असल स्वरूप को जानने में बाधा बनकर खड़े हैं! अपने सत्यस्वरूप में स्थित रहना, उसी आत्म-भाव में जीना ही असली जीवन है। हमें हर क्षण वही चुनाव करना है जो जीवन को भरपूर कर दे, स्वयं में आत्मसात कर दे, और संसार की छोटी-छोटी चीज़ों से मुक्त कर दे। हमें इस बात के लिए विवश (compel) कर दे कि हम हर रूप में, हर जीव में सिर्फ और सिर्फ परमात्मा को देखें, साक्षात श्रीकृष्ण को देखें, और इसी परम भाव में अपना संपूर्ण जीवन जिएं !