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मैं राम का होकर रह गया

ऊं शक्ति

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मैं राम का होकर रह गया

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ऊं शक्ति
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इस गीत की आत्मा इन पंक्तियों में है: “जग छूटे तो छूटे स्वामी, छूटे ना तेरा द्वार।” यही वैराग्य है—संसार से भागना नहीं, बल्कि संसार के मोह से मुक्त होकर प्रभु श्रीराम के प्रेम में स्थिर हो जाना।