राणा बेनीमाधव सिंह उनकी वीरगाथा || 1857 की शुरुवाती क्रांति में योगदान जानिए ?
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राणा बेनीमाधव सिंह उनकी वीरगाथा || 1857 की शुरुवाती क्रांति में योगदान जानिए ?
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राणा बेनी माधव सिंह बैसवारा के शक्तिशाली राजा थे, जो एक( बैस राजपूत) थे । जिनका सेनापति महाबली वीरापासी था ,जानने के लिए पूरा वीडियो देखें ।
उन्नीसवी शताब्दी में अवध के शासक जो दिल्ली के मुग़ल बादशाहों के प्रतिनिधि थे और नवाब कहलाते थे उन्होंने दिल्ली दरबार की कमजोरी का लाभ उठाकर स्वयं को अवध का स्वतंत्र बादशाह घोषित किया और ‘शाह’ की उपाधि धारण की I अवध की राजधानी नवाब आस्फुद्दौलाह के समय में ही फ़ैजाबाद से स्थान्तरित होकर लखनऊ आ चुकी थी I अवध की बादशाहत कबूल करने वाले पहले नवाब गाजीउद्दीन हैदर थे, जिन्होंने शाहे अवध के रूप में 1819 से 1827 तक शासन किया I अवध के आख़री बादशाह वाजिद अली शाह (1847-1856) थे I चूंकि वाजिदअली शाह नवाब भी कहे जाते है इसलिए कुछ लोगो ने उनकी बादशाहत पर प्रश्न चिह्न भी खड़े किये हैं, पर इतिहास ने उसे स्वीकार नही किया I वाजिद अली शाह के समय रायबरेली जनपद के विख्यात शंकरपुर गढ़ के सामंत राना बेनीमाधव थे I राना को शंकरपुर गढ़ की तालुकेदारी अपने चाचा राजा शिवप्रसाद सिंह से प्राप्त हुयी I शिवप्रसाद सिंह की दो संतानें थी – एक पुत्री और दूसरा पुत्र फ़तेह बहादुर I फ़तेह बहादुर की अल्पायु में ही मृत्यु हो गयी I परिणामस्वरुप राजा शिवप्रसाद को उत्तराधिकारी हेतु अपने भतीजो पर विचार करना पड़ा I राजा साहेब के दो छोटे भाई थे –राम नारायन और शिवगोपाल सिंह I शिवगोपाल सिंह संभवतः निःसंतान थे, किन्तु राम नारायन के तीन पुत्र थे – बेनीमाधव, नरपति सिंह और जोगराज सिंह I इनमे बेनीमाधव सबसे बड़े और प्रतिभाशाली थे I तीर, तलवार और भाला चलाने में वे बेजोड़ थे I दंगल और अखाड़े में भी वे सबसे आगे थे I अश्व-संचालन की उनकी प्रतिभा अद्वतीय थी I उनके इन्ही गुणों पर रीझ कर राजा शिवप्रसाद ने उन्हें गोद लेकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया I कालान्तर में तालुकेदारी की कमान हाथ में आते ही बेनीमाधव ने अपनी भू-संपत्ति का विस्तार तो किया ही एक अच्छी खासी सेना भी संगठित कर ली I
राणा बेनी माधव सिंह बैसवारा के राजा थे जिन्होंने अंग्रजो को लोहे चने चबवा दिए ,राणा जी बैस राजपूत थे
लख्ननऊ मे क्रांति का सूत्रपात 30 मई 1857 की रात को हुआ I उस समय बेनीमाधव 15000 सैनिको और सहयोगी तालुकेदारों के साथ वहां उपस्थित थे I बेलीगारद, रेजीडेंसी और आलमबाग़ के युद्ध में राना की महत्वपूर्ण भूमिका रही I बेगम हजरतमहल ने इन युद्धों में राना के अद्वतीय पराक्रम से प्रभावित होकर उन्हे ‘दिलेरजंग’ का ख़िताब अत़ा फरमाया I
क्रांतिकारियों के अभूतपूर्व पराक्रम से कुछ दिनों के लिए लखनऊ पर बेगम का आधिपत्य हुआ I लखनऊ को यह अस्थायी आजादी दिलाने में राना बेनीमाधव की अहम भूमिका थी जिसके लिए बेगम ने राना को ‘खिलअत ‘ भी भेंट की थी I इस आजादी का लाभ उठाकर बेगम हजरतमहल ने राना की सहायता से 5 जूलाई 1857 को अपने 12 वर्षीय बेटे की ताजपोशी नवाब-ए- अवध के रूप में की
उन्नाव के बैसवारा ताल्लुक के राजा राना बेनी माधव सिंह ने रायबरेली के एक बड़े हिस्से में अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ क्रांति की मशाल जलाई थी। अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने वाले राजा बेनी माधव रायबरेली जिले के लिए महानायक बने। सन् 1857 क्रंाति के दौरान जनपद रायबरेली में बेनी माधव ने 18 महीने तक जिले को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराया था।
राणा बेनी माधव सिंह की यशोगाथा जानने के लिए वीडियो पूरा देखे ।
और सेनापति वीरा पासी की विडीओ देखना न भूले ।
सेनापति वीरापासी का वीडियो दे👇👇👇👇👇👇👇👇
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