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11-10-26 Sunday Evening Message - Abel and Christ - Offering the best

Mahima AG Church

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11-10-26 Sunday Evening Message - Abel and Christ - Offering the best

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उत्पत्ति 4:4-5 [4] और हाबिल भी अपनी भेड़–बकरियों के कई एक पहिलौठे बच्‍चे भेंट चढ़ाने ले आया और उनकी चर्बी भेंट चढ़ाई; तब यहोवा ने हाबिल और उसकी भेंट को तो ग्रहण किया, [5] परन्तु कैन और उसकी भेंट को उसने ग्रहण न किया। तब कैन अति क्रोधित हुआ, और उसके मुँह पर उदासी छा गई। उत्पत्ति 4:6-7 [6] तब यहोवा ने कैन से कहा, “तू क्यों क्रोधित हुआ? और तेरे मुँह पर उदासी क्यों छा गई है? [7] यदि तू भला करे, तो क्या तेरी भेंट ग्रहण न की जाएगी? और यदि तू भला न करे, तो पाप द्वार पर छिपा रहता है; और उसकी लालसा तेरी ओर होगी, और तुझे उस पर प्रभुता करनी है।” उत्पत्ति 4:8 [8] तब कैन ने अपने भाई हाबिल से कुछ कहा; और जब वे मैदान में थे, तब कैन ने अपने भाई हाबिल पर चढ़कर उसे घात किया; मरकुस 15:10 [10] क्योंकि वह जानता था कि प्रधान याजकों ने उसे डाह से पकड़वाया था। इफिसियों 5:2 [2] और प्रेम में चलो जैसे मसीह ने भी तुम से प्रेम किया, और हमारे लिये अपने आप को सुखदायक सुगन्ध के लिये परमेश्‍वर के आगे भेंट करके बलिदान कर दिया। गलातियों 1:4 [4] उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्‍वर और पिता की इच्छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। 2 कुरिन्थियों 8:9 [9] तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह जानते हो कि वह धनी होकर भी तुम्हारे लिये कंगाल बन गया, ताकि उसके कंगाल हो जाने से तुम धनी हो जाओ। 2 कुरिन्थियों 8:5 [5] और जैसी हम ने आशा की थी, वैसी ही नहीं वरन् उन्होंने प्रभु को फिर परमेश्‍वर की इच्छा से हम को भी अपने आपको दे दिया। इब्रानियों 12:24 [24] और नई वाचा के मध्यस्थ यीशु और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो, जो हाबिल के लहू से उत्तम बातें कहता है। यह संडे इवनिंग संदेश (11-10-26) बाइबिल के पात्र हाबिल (Abel) और उनके बलिदान पर केंद्रित है, जिसे यीशु मसीह के एक "प्रकार" (type) या छाया के रूप में देखा गया है। वक्ता इस बात पर जोर देते हैं कि परमेश्वर को केवल पैसा नहीं, बल्कि अपना पूरा जीवन एक निष्कपट और इच्छुक हृदय से समर्पित करना महत्वपूर्ण है। प्रमुख चर्चा के विषय: हाबिल का जीवन यीशु की छाया के रूप में (5:39 - 14:02): वक्ता हाबिल और यीशु के बीच चार समानताएं बताते हैं: 1. स्वभाव: दोनों धर्मी थे। 2. ईर्ष्या: जैसे हाबिल से उसके भाई कैन ने ईर्ष्या की, वैसे ही धार्मिक नेताओं ने यीशु से ईर्ष्या की। 3. उत्तम बलिदान: दोनों ने अपना सर्वश्रेष्ठ अर्पित किया, जिसे पिता ने स्वीकार किया। 4. लहू की पुकार: हाबिल का लहू न्याय के लिए चिल्लाता था, जबकि यीशु का लहू दया और क्षमा की बातें करता है (14:26 - 14:43)। देने के सिद्धांत (7:20 - 48:00): अपना सर्वश्रेष्ठ दें: विश्वासियों को अपने पास मौजूद सबसे अच्छी चीज़ें (firstlings) परमेश्वर को अर्पित करनी चाहिए (18:52 - 19:13)। हृदय की स्थिति: दान दबाव में नहीं, बल्कि खुशी और समर्पण के साथ दिया जाना चाहिए (8:01 - 8:14)। स्वयं को पहले समर्पित करें: धन या प्रतिभा देने से पहले व्यक्ति को अपना जीवन परमेश्वर को सौंपना चाहिए (15:24 - 15:35)। कर्मकांड से ऊपर आज्ञाकारिता: सच्ची आराधना परमेश्वर के निर्देशों के पालन में है, न कि स्वयं द्वारा बनाए गए धार्मिक कार्यों में (37:23 - 40:01)। बलिदान के रूप में जीना (54:44 - 1:03:20): वक्ता बताते हैं कि विश्वासियों को परमेश्वर के लिए एक "सुगंधित भेंट" के रूप में जीना चाहिए, जैसा कि यीशु ने पिता की इच्छा के अनुसार संसार के लिए अपना बलिदान दिया। लहू की शक्ति (1:16:41 - 1:22:21): इब्रानियों 12:24 के आधार पर, वक्ता स्पष्ट करते हैं कि यीशु का लहू हाबिल के लहू से श्रेष्ठ है, क्योंकि यह क्षमा और पिता तक पहुँच प्रदान करता है। This Sunday evening message (11-10-26) focuses on the biblical character of Abel and his offering as a "type" or shadow of Jesus Christ. The speaker explores the importance of giving—not just money, but one's whole life—to God with a sincere and willing heart. Key themes discussed: The Life of Abel as a Shadow of Christ (5:39 - 14:02): The speaker identifies four key similarities between Abel and Jesus: 1. Character: Both were righteous. 2. Envy: Abel was envied by his brother Cain, just as the religious leaders envied Jesus. 3. The Best Offering: Both offered their best, which the Father accepted. 4. The Cry of Blood: The blood of Abel cried out from the ground, while the blood of Jesus speaks of mercy and better things (14:26 - 14:43). Principles of Giving (7:20 - 48:00): Give your best: Like Abel, believers should offer the "firstlings" or the best of what they have (18:52 - 19:13). Heart condition: Giving should be done with a cheerful, willing, and surrendered heart, not out of pressure or obligation (8:01 - 8:14). Surrender yourself first: Before offering money or talents, one must first dedicate their life to God. The speaker emphasizes that God desires the person more than their wealth (15:24 - 15:35). Obedience over rituals: True worship involves obedience to God's instructions, rather than relying on self-made religious efforts or works to earn acceptance (37:23 - 40:01). Living as a Sacrifice (54:44 - 1:03:20): The message stresses that believers are called to be a "fragrant aroma" to God, living a life of love and sacrifice similar to Jesus, who gave Himself for the world according to the Father's will.