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पापांकुशा एकादशी: क्रोधन बहेलिया | दीपावली कथा | धर्म कथा EP 122

Dharma Katha धर्म कथा

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पापांकुशा एकादशी: क्रोधन बहेलिया | दीपावली कथा | धर्म कथा EP 122

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Dharma Katha धर्म कथा
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नाम था क्रोधन। यानी क्रोधी। विंध्याचल के पहाड़ों में रहता था, और पक्षी पकड़कर पेट भरता था। जाल, फंदे, नुकीली लकड़ी। पर व्रत कथा कहती है, यह तो सबसे छोटी बात थी। राहगीरों को लूटता। मदिरा पीता। बुरी संगत। बिना कारण लोगों को कष्ट देता। जीवन भर, केवल लिया। कभी कुछ दिया नहीं। और एक दिन, जब बूढ़ा हो चला, यमदूत उसके पास आए। धर्म कथा — सीज़न 4: दीपावली की ओर — एपिसोड 122 स्रोत: Ekadashi vrat katha tradition (Papankusha / Ashvin Shukla Ekadashi) ▶ पूरा सीज़न देखें:    • धर्म कथा सीज़न 4: दीपावली की ओर (हिंदी)   🎧 पॉडकास्ट पर सुनें: https://rss.com/podcasts/dharma-katha... पिछला भाग: एपिसोड 120। स्रोत। श्रेणी: परंपरा। विंध्य पर्वत के बहेलिये क्रोधन की कथा, जिसने अंगिरा ऋषि से पापांकुशा एकादशी का व्रत जानकर मुक्ति पाई, एकादशी व्रत कथा परंपरा में, श्री कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को कही गई कथा के रूप में आती है। छपी पुस्तिकाएँ इसे ब्रह्मवैवर्त पुराण से बताती हैं। विवरण अलग-अलग हैं, और मैंने इसे किसी प्रामाणिक पुराण-संस्करण से नहीं मिलाया। दो हज़ार छब्बीस की तिथि, बाईस अक्टूबर, ड्रिक पंचांग जैसे प्रकाशित पंचांगों से है। नाम का अर्थ और बाकी विचार मेरे हैं। सूचना: श्लोक प्रकाशित संस्करणों से उद्धृत हैं; उन पर निर्भर होने से पहले किसी संस्कृत विद्वान से जाँच करा लें। इस कथा का वाचन AI आवाज़ में किया गया है। #दीपावली #धर्मकथा #रामायण #सनातनधर्म #Diwali