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अशोक वाटिका में शुभ समाचार | दीपावली कथा | धर्म कथा EP 121

Dharma Katha धर्म कथा

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अशोक वाटिका में शुभ समाचार | दीपावली कथा | धर्म कथा EP 121

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Dharma Katha धर्म कथा
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अशोक वाटिका। अशोक, यानी जहाँ शोक न हो। और उसी वाटिका में, एक वृक्ष के नीचे, महीनों से शोक में बैठी हैं माँ सीता। लाल फूल झरते हैं, जल बहता है, पक्षी बोलते हैं। और बीच में वे बैठी हैं। एक ही वस्त्र। एक ही लंबी, उलझी हुई वेणी। देह दुर्बल, मुख पीला। चारों ओर राक्षसियाँ, दिन-रात, जिनका एक ही काम है, डराना। धर्म कथा — सीज़न 4: दीपावली की ओर — एपिसोड 121 स्रोत: Valmiki Ramayana, Yuddha Kanda (Hanuman brings Sita the news; 'no one is without fault') ▶ पूरा सीज़न देखें:    • धर्म कथा सीज़न 4: दीपावली की ओर (हिंदी)   🎧 पॉडकास्ट पर सुनें: https://rss.com/podcasts/dharma-katha... पिछला भाग: एपिसोड 103। स्रोत। श्रेणी: शास्त्र। यह प्रसंग वाल्मीकि रामायण, युद्ध कांड से है। विभीषण का अभिषेक, राम जी का हनुमान को सीता के पास भेजना, हर्ष से सीता जी का मौन, हनुमान को पुरस्कार देने की इच्छा, राक्षसियों को मारने का हनुमान का प्रस्ताव, सीता जी का मना करना, भालू द्वारा बाघ से कहे श्लोक का उल्लेख, राम जी को देखने की इच्छा, और राम जी के आँसू व विभीषण को आदेश। सर्ग संख्या आलोचनात्मक संस्करण और प्रचलित संस्करणों में अलग है। प्रचलित संस्करणों में यह लगभग सर्ग एक सौ बारह से एक सौ चौदह में है। भालू, बाघ और शिकारी की पूरी कथा बाद के टीकाकारों और कथावाचकों की है, वाल्मीकि इसे नहीं सुनाते। श्लोक प्रचलित पाठ से है, जैसा प्रायः उद्धृत होता है। इसकी पुष्टि किसी संस्कृत जानकार से करा लेनी चाहिए। विचार मेरे हैं। सूचना: श्लोक प्रकाशित संस्करणों से उद्धृत हैं; उन पर निर्भर होने से पहले किसी संस्कृत विद्वान से जाँच करा लें। इस कथा का वाचन AI आवाज़ में किया गया है। #दीपावली #धर्मकथा #रामायण #सनातनधर्म #Diwali