गीता 1.9 | "मेरे लिए" कहने वाला अहंकार | गीता से ज्ञान
Sandeep Sharma
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गीता 1.9 | "मेरे लिए" कहने वाला अहंकार | गीता से ज्ञान
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Sandeep Sharma
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दुर्योधन ने अपनी सेना के बारे में बार-बार "मेरे लिए" क्यों कहा? और इससे हम अपने काम और रिश्तों के बारे में क्या सीख सकते हैं?
📖 श्लोक
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः॥
🔎 सरल अर्थ
और भी बहुत से शूरवीर हैं, जिन्होंने मेरे लिए अपने जीवन की आशा छोड़ दी है। वे अनेक प्रकार के शस्त्रों से लड़ने वाले हैं और सभी युद्ध में निपुण हैं।
💡 आज की सीख
• लोग किसके लिए काम करते हैं, इससे फ़र्क़ पड़ता है।
• जो आपके लिए बहुत कुछ छोड़ दे, उसकी कद्र कीजिए।
• इरादे के साथ तैयारी और हुनर भी ज़रूरी हैं।
🌟 आज का अभ्यास
एक वाक्य में लिखिए कि आप अपना काम किसके लिए करते हैं।
📚 स्रोत: श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय 1, श्लोक 9
🎧 बेहतर अनुभव के लिए हेडफ़ोन के साथ सुनें।
🎙️ आवाज़: ElevenLabs (AI)
🙏 अगला श्लोक: अध्याय 1, श्लोक 10। चैनल को सब्सक्राइब करें।
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Pinned comment: आज का सवाल: आप अपना काम किसके लिए करते हैं, अपने लिए या किसी बड़े उद्देश्य के लिए? नीचे लिखिए। 🙏