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हनुमान की शक्ति

Madhuvichar

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हनुमान की शक्ति

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Madhuvichar
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सुनो-सुनो वीर हनुमाना, आज तुम्हें शक्ति पहचाननी है, राम काज का समय है आया, अब लंका की राह बनानी है। सागर के तट पर वानर सेना, चिंता में थी आज, इतने गहरे सागर को कैसे, करें भला हम पार। सबने अपनी शक्ति बताई, पर कोई आगे न आया, लंका तक कौन पहुँचाए संदेश, कोई समझ न पाया। हनुमत बैठे शांत किनारे, अपने बल से अनजान, बाल समय के ऋषि-शाप से, भूल गए थे अपना ज्ञान। जामवंत जी सब जानते थे, उनको था विश्वास, बोले—वीर, तुम्हें बस कोई, कराए शक्ति का आभास। तुम पवनपुत्र, तुम महाबली, तुममें शक्ति अपार, अपना बल पहचानो हनुमत, तुम कर सकते सागर पार। राम काज के लिए उठो अब, जागो वीर हनुमान, तुमसे बढ़कर कौन जगत में, बलशाली बलवान। जामवंत की बात सुनकर, जाग उठा बल सारा, राम नाम हृदय में गूँजा, लाँघ गए सागर सारा। पर्वत पर चढ़कर हुँकार भरी, गूँज उठा आसमान, श्रीराम का नाम पुकारकर, उड़ चले वीर हनुमान। राह में आईं बाधाएँ, पर रुके नहीं बलवान, राम काज को सबसे ऊपर रखकर, बढ़ते गए हनुमान। जिस शक्ति को भूल गए थे, उसका हुआ आभास, जामवंत के शब्दों ने जगाया, मन में अटूट विश्वास। राम नाम जब साथ हो हनुमत, कौन रोक सकता उड़ान, भक्ति, शक्ति और राम भरोसा, बन गए उनके प्राण। लंका पहुँचकर वीर हनुमाना, राम काज पूरा किया, सागर के उस पार पहुँचकर, श्रीराम का संदेश दिया। बोलो—जय श्रीराम! जय श्रीराम! बोलो पवनपुत्र हनुमान की— जय! जय! जय! जय हनुमान! 🚩 जय हनुमान! 🚩 जय हनुमान! 🚩 जय हनुमान! 🚩 जय हनुमान! जय हनुमान! #bhakti #youtube #madhuvichar