मां की शक्ति, राम की विजय
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मां की शक्ति, राम की विजय
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जय अम्बे, जय जगदम्बे
जय दुर्गे, जय भवानी
तेरी महिमा सबसे न्यारी
तू जग की महारानी
सीता माता को हरकर रावण
मन ही मन इतराया
सोने की लंका का राजा
खुद को सबसे बड़ा बताया
माँ की शक्ति समझ न पाया
अपने घमंड में चूर रहा
सीता माता को हरकर उसने
अपना बुरा समय बुला लिया
जय अम्बे, जय जगदम्बे
जय-जय माँ भवानी
तेरी शक्ति से जग चलता
तू ही जग की महारानी
सीता माता को छुड़ाने
राम ने मन में ठानी
धर्म बचाने, मान बचाने
चली विजय की कहानी
लंका पर चढ़ने से पहले
राम ने माँ को याद किया
हाथ जोड़कर शीश झुकाया
माँ दुर्गा का पूजन किया
हे माँ दुर्गे, हे महाकाली
शक्ति दो माँ, शेरोंवाली
सीता माता को छुड़ाना है
धर्म की लाज बचानी है
राम की पूजा माँ ने सुनी
अपना आशीष बरसाया
शक्ति और विश्वास देकर
विजय का रास्ता दिखाया
माँ की शक्ति, राम की विजय
गूँजे जय-जयकार
माँ का आशीष साथ हो जिसके
उसकी नैया करे पार
हनुमान जी राम का झंडा
लेकर आगे बढ़ते थे
जय श्रीराम का नाम पुकारकर
संकट से वे लड़ते थे
लक्ष्मण जी और वीरों की टोली
राम के साथ में आई
वानर सेना संग में लेकर
लंका की ओर चढ़ाई
उधर रावण घमंड में बैठा
खुद को बहुत महान समझता था
भूल गया वह अपने पापों को
खुद को सबसे बलवान समझता था
राम के बाण चले रण में
लंका में हलचल छाई
माँ की शक्ति, राम के साहस ने
धर्म की जीत कराई
रावण का घमंड टूट गया
उसका अंत भी आया
सीता माता मुक्त हुईं
राम ने धर्म निभाया
जय अम्बे, जय जगदम्बे
तेरी महिमा अपरंपार
माँ की शक्ति, राम की विजय
गूँजे जय-जयकार
दशहरे का पर्व हमें बताता
घमंड कभी नहीं टिकता
बुराई चाहे कितनी बढ़ जाए
अंत में सत्य ही जीतता
माँ की शक्ति, राम की विजय
हर दिल में बस जाए
जय श्रीराम, जय दुर्गे माता
घर-घर ज्योत जगाए
जय माता दी! जय माता दी!
जय-जय माँ भवानी!
जय श्रीराम! जय हनुमान!
जय अम्बे कल्याणी!
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