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शुद्ध आत्मा का वास्तविक स्वरूप क्या है? | प्रमत्त और अप्रमत्त से परे | समयसार गाथा ६

Jain-Swadhyay

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शुद्ध आत्मा का वास्तविक स्वरूप क्या है? | प्रमत्त और अप्रमत्त से परे | समयसार गाथा ६

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📖 समयसार गाथा ६ | प्रमत्त और अप्रमत्त से परे शुद्ध ‘ज्ञायक’ आत्मा *समयसार गाथा ६* में आचार्य कुन्दकुन्द देव शुद्ध आत्मा के अत्यंत गहन स्वरूप की ओर संकेत करते हैं। *शुद्ध निश्चय नय* से आत्मा को केवल उसकी बदलती हुई अवस्थाओं के आधार पर नहीं समझा जा सकता। आत्मा का वास्तविक स्वरूप *ज्ञायक — ज्ञानस्वरूप, जानने और देखने वाला चैतन्य* है। इस वीडियो में *श्रीमद्भगवत्कुन्दकुन्दाचार्य देव प्रणीत समयसार की गाथा ६* का मूल पाठ, पद्यानुवाद, सरल हिंदी अर्थ और आध्यात्मिक भाव को विस्तार से समझने का प्रयास किया गया है। 🔱 समयसार गाथा ६ का मुख्य प्रश्न क्या आत्मा *प्रमत्त* है? क्या आत्मा *अप्रमत्त* है? या इन दोनों बदलती हुई अवस्थाओं से परे आत्मा का कोई ऐसा *शुद्ध और ध्रुव स्वरूप* है जिसे केवल *ज्ञायक भाव* कहा जा सकता है? समयसार गाथा ६ इसी गहन आत्मचिंतन की ओर ले जाती है। 📜 समयसार गाथा ६ — मूल प्राकृत गाथा **णवि होदि अप्पमत्तो ण पमत्तो जाणओ दु जो भावो। एवं भणंति सुद्धं णाओ जो सो तु तन्मओ सव्वो॥६॥** 🌿 हिंदी पद्यानुवाद **ना अप्रमत्त ना प्रमत्त है, जो एक केवल ‘ज्ञायक’ भाव। इस भाँति शुद्धात्मा कहे जो, ज्ञान में ही लीन भाव॥६॥** 🪷 गाथा ६ का आध्यात्मिक मर्म इस गाथा में *प्रमत्त और अप्रमत्त दशाओं* तथा आत्मा के *शुद्ध ज्ञायक स्वरूप* के बीच के अंतर को समझने का अवसर मिलता है। व्यवहार की दृष्टि से जीव की विभिन्न अवस्थाएँ और गुणस्थान दिखाई देते हैं। लेकिन *शुद्ध निश्चय नय* से आत्मा का विचार करने पर आत्मा का ध्रुव स्वरूप इन बदलती हुई पर्यायों से भिन्न जाना जाता है। इसीलिए गाथा ६ में *ज्ञायक भाव* को आत्मा के शुद्ध स्वरूप की दृष्टि से समझाया गया है। 🔎 इस वीडियो में हम समझेंगे • समयसार गाथा ६ का मूल प्राकृत पाठ • समयसार गाथा ६ का हिंदी पद्यानुवाद • गाथा ६ का सरल अर्थ • प्रमत्त किसे कहा जाता है? • अप्रमत्त किसे कहा जाता है? • प्रमत्त और अप्रमत्त दशाओं का अर्थ • शुद्ध निश्चय नय से आत्मा का स्वरूप • ‘ज्ञायक भाव’ क्या है? • आत्मा और उसकी बदलती पर्यायों का संबंध • ध्रुव चैतन्य स्वरूप की समझ • शुद्ध आत्मा को पहचानने की दिशा • समयसार में आत्मस्वरूप का निरूपण • आचार्य कुन्दकुन्द देव की आत्मदृष्टि • जैन दर्शन में ज्ञाता-दृष्टा आत्मा का स्वरूप 📚 समयसार स्वाध्याय यात्रा यह वीडियो *श्रीमद्भगवत्कुन्दकुन्दाचार्य देव प्रणीत ‘समयसार’* की क्रमिक स्वाध्याय यात्रा का एक भाग है। गाथा १ और २ में सिद्धों के गुण तथा *स्वसमय और परसमय* की चर्चा से आगे बढ़ते हुए, गाथा ३ में आत्मा के वास्तविक स्वरूप, गाथा ४ में संसार के भोग-बन्धन और आत्मा की दुर्लभ उपलब्धि तथा गाथा ५ में आचार्य की महान प्रतिज्ञा के पश्चात् *गाथा ६ आत्मा के शुद्ध ज्ञायक भाव* की ओर हमारा ध्यान ले जाती है। 🙏 इस गहन आध्यात्मिक स्वाध्याय में जुड़े रहें। *जय जिनेन्द्र।* 🔍 Search Keywords समयसार गाथा 6, समयसार गाथा ६, समयसार गाथा 6 का अर्थ, समयसार गाथा 6 व्याख्या, समयसार गाथा ६ हिंदी, समयसार गाथा 6 प्रवचन, समयसार गाथा 6 explanation, Samaysar Gatha 6, Samayasara Gatha 6, Samaysar Gatha 6 Hindi, Samayasara Gatha 6 Hindi, Samaysar Chapter 6, Samaysar Gatha explanation, समयसार, Samaysar, Samayasara, आचार्य कुन्दकुन्द, कुन्दकुन्दाचार्य, Kundkundacharya, Kundakunda Acharya, Jainism, Jain Dharma, Jain Philosophy, Jain Darshan, जैन दर्शन, जैन धर्म, जैन अध्यात्म, जैन दर्शन हिंदी, ज्ञायक भाव, ज्ञायक आत्मा, शुद्ध आत्मा, शुद्धात्मा, आत्मा का स्वरूप, आत्मस्वरूप, आत्मज्ञान, शुद्ध निश्चय नय, प्रमत्त, अप्रमत्त, प्रमत्त और अप्रमत्त, प्रमत्त अप्रमत्त, ज्ञाता दृष्टा आत्मा, चैतन्य आत्मा, समयसार प्रवचन, समयसार व्याख्या, समयसार स्वाध्याय #समयसार, #समयसारगाथा, #समयसारगाथा6, #समयसारगाथा६, #गाथा6, #कुन्दकुन्दाचार्य, #आचार्यकुन्दकुन्द, #ज्ञायक, #ज्ञायकभाव, #शुद्धात्मा, #आत्मज्ञान, #आत्मस्वरूप, #शुद्धनिश्चयनय, #प्रमत्त, #अप्रमत्त, #जैनधर्म, #जैनदर्शन, #जैनअध्यात्म, #Jainism, #Samaysar, #Samayasara, #SamaysarGatha, #SamayasaraGatha, #JainPhilosophy, #JainDharma, #Kundkundacharya 🏷️ YOUTUBE TAGS समयसार गाथा 6,समयसार गाथा ६,समयसार गाथा 6 हिंदी,समयसार गाथा ६ हिंदी,समयसार गाथा 6 का अर्थ,समयसार गाथा 6 व्याख्या,समयसार गाथा 6 प्रवचन,समयसार गाथा 6 explanation,समयसार गाथा 6 meaning,समयसार गाथा 6 pravachan,Samaysar Gatha 6,Samayasara Gatha 6,Samaysar Gatha 6 Hindi,Samayasara Gatha 6 Hindi,Samaysar Gatha 6 explanation,Samaysar Gatha 6 meaning,Samayasara Gatha 6 explanation,Samaysar,Samayasara,समयसार,समयसार प्रवचन,समयसार व्याख्या,समयसार हिंदी,समयसार स्वाध्याय,समयसार का अर्थ,आचार्य कुन्दकुन्द,कुन्दकुन्दाचार्य,Kundkundacharya,Kundakunda Acharya,जैन धर्म,Jainism,Jain Dharma,Jain Philosophy,Jain Darshan,जैन दर्शन,जैन अध्यात्म,जैन दर्शन हिंदी,ज्ञायक,ज्ञायक भाव,ज्ञायक आत्मा,शुद्ध आत्मा,शुद्धात्मा,शुद्ध निश्चय नय,आत्मा का स्वरूप,आत्मस्वरूप,आत्मज्ञान,प्रमत्त,अप्रमत्त,प्रमत्त और अप्रमत्त,प्रमत्त अप्रमत्त,ज्ञाता दृष्टा,चैतन्य आत्मा,शुद्ध आत्मा का स्वरूप,Jain Spirituality,Jain Philosophy Hindi,Jain Gatha,Jain Granth,Jain Scripture