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दोपहर का भोजन | अमरकांत | पूरी कहानी | Dopahar Ka Bhojan | Amarkant | Full Story | Hindi Stories

The Katha Trails

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दोपहर का भोजन | अमरकांत | पूरी कहानी | Dopahar Ka Bhojan | Amarkant | Full Story | Hindi Stories

918 просмотров · 9 дней назад
The Katha Trails
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अमरकांत (1925–2014) आधुनिक हिंदी साहित्य के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और सम्मानित लेखक थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था और बाद में एक पत्रकार के रूप में भी काम किया। प्रमुख रचनाएँ: 'दोपहर का भोजन' के अलावा उनकी अन्य प्रसिद्ध कहानियों में 'डिप्टी कलेक्टरी' और 'जिंदगी और जोंक' शामिल हैं। उन्होंने 'इन्हीं हथियारों से' और 'काले-उजले दिन' जैसे बेहतरीन उपन्यास भी लिखे। दोपहर का भोजन' अमरकांत द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध कहानी है, जो एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार की अत्यधिक गरीबी और संघर्ष को दिखाती है।कहानी के मुख्य बिंदु:मुख्य पात्र: सिद्देश्वरी (मां), मुंशी जी (पिता), और उनके तीन बेटे (रामचंद्र, मोहन, प्रमोद)।कहानी का सार: मुंशी जी की नौकरी छूट जाने के कारण घर में खाने की भारी किल्लत है। दोपहर के भोजन के समय, मां (सिद्देश्वरी) परिवार के हर सदस्य से झूठ बोलती है कि दूसरा बहुत खुश है, ताकि कोई आर्थिक तंगी की वजह से परेशान न हो। वह खुद भूखी रहकर भी परिवार को जोड़े रखने का प्रयास करती है।मूल संदेश: यह कहानी गरीबी में पिसते परिवार की लाचारी, भूख और उस दुख में भी एक मां के त्याग और ममता को दर्शाती है। #दोपहरकाभोजन#अमरकांत#हिंदीकहानी#ममताऔरत्याग#DopaharKaBhojan#HindiKahani #DopaharKaBhojan#AmarkantStories#HindiLiterature#ClassicHindiStories#StruggleOfPoverty#MothersSacrifice#IndianFiction