कफन | मुंशी प्रेमचंद | पूरी कहानी | Kafan by Munshi Premchand | FULL STORY | Famous Hindi Story
The Katha Trails
0:00 / 0:00
कफन | मुंशी प्रेमचंद | पूरी कहानी | Kafan by Munshi Premchand | FULL STORY | Famous Hindi Story
173 просмотра · 5 дней назад
The Katha Trails
26 подписчиков
173 просмотра · 5 дней назад
'कफ़न' महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद द्वारा 1936 में लिखी गई उनकी अंतिम और सबसे प्रसिद्ध कहानियों में से एक है। यह कहानी समाज की अत्यधिक गरीबी, संवेदनहीनता और सामाजिक विषमता पर एक तीखा प्रहार करती है।
कहानी का संक्षिप्त सारांश
यह कहानी घीसू और उसके बेटे माधव की है, जो बेहद आलसी, कामचोर और गरीब मजदूर हैं। माधव की पत्नी बुधिया प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) से झोपड़ी के अंदर तड़प रही होती है, लेकिन ये दोनों बाहर बैठकर अलाव में चोरी के आलू भूनकर खाने में व्यस्त रहते हैं। इस डर से कि कोई एक दूसरे के हिस्से का आलू न खा जाए, दोनों बुधिया को देखने अंदर भी नहीं जाते।
सुबह तक बुधिया और उसके अजन्मे बच्चे की मौत हो जाती है। लाश के अंतिम संस्कार और कफ़न के लिए उनके पास पैसे नहीं होते। वे गाँव के जमींदार और लोगों से भीख मांगकर पैसे इकट्ठा करते हैं। लेकिन जब वे बाजार में कफ़न खरीदने जाते हैं, तो उनकी नीयत बदल जाती है। वे सोचते हैं कि कफ़न तो अंततः जल ही जाना है, इसलिए वे उन पैसों से शराबखाने में जाकर भरपेट पूरियाँ, मछली और शराब खरीदकर ऐश करते हैं।
वे नशे में झूमते, गाते और नाचते हुए वहीं गिर पड़ते हैं, जबकि पीछे गाँव में बुधिया की लाश कफ़न का इंतजार करती रह जाती है।
मुख्य संदेश
प्रेमचंद इस कहानी के माध्यम से दिखाते हैं कि अत्यधिक गरीबी इंसान की संवेदनाओं और मानवता को पूरी तरह मार देती है। यह उस सामाजिक व्यवस्था पर भी व्यंग्य है जो इंसान को जीते जी दो वक्त की रोटी नहीं दे पाती, लेकिन उसके मरने पर दिखावे के कफ़न के लिए पैसे जुटा लेती है।
#Kafan #MunshiPremchand #HindiSahitya #PremchandStories #HindiKahani #ClassicLiterature #ShortStory #IndianLiterature #SocialRealism #कफ़न #मुंशी_प्रेमचंद #हिंदी_साहित्य