रात का पहरेदार | Soye Kasbe ka Saathi | Raat Ki Kahani
Bacho ka Bhavisya
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रात का पहरेदार | Soye Kasbe ka Saathi | Raat Ki Kahani
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Bacho ka Bhavisya
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Raat ki kahani — चालीस साल तक पूरे कस्बे को सुलाकर जागने वाले पहरेदार बुधराम की आख़िरी ड्यूटी वाली रात, उसने नए पहरेदार के लिए कौन सी पर्ची छोड़ी?
सोए हुए रामपुर के पहरेदार बुधराम की यह raat ko sunne wali kahani धीमी, शांत और मन को ठहराव देने वाली है। ताले जाँचना, एक पुरानी सीटी की याद, बीमार अम्मा की खिड़की और भोर से पहले लाठी-लालटेन की सौंप — यह calm night story in hindi बड़ों के लिए है, जो रात को सुकून चाहते हैं। अंत में भरोसा एक हाथ से दूसरे हाथ में जाता है, और पहरेदार चालीस साल में पहली बार दिन चढ़ने तक सोता है।
कहानी के अध्याय:
00:00 रात के दो बजे हैं। रामपुर की गलियों में सब…
01:34 बरसात की रातों में बुधराम का काम सबसे कठिन…
03:17 आगे वह आँगन था, जहाँ बुधराम का सबसे पुराना…
04:59 चक्कर के आख़िरी हिस्से में बुधराम अपने घर…
06:36 किशन ने बुधराम के पैर छुए और कहा — काका, र…
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