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一冊の本から、こっそりインドへ

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一冊の本から、こっそりインドへ

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日本語 『一冊の本から、こっそりインドへ』 大学3年から4年になる前、親に内緒でインドへ行きました。実家を離れて暮らしていた頃のこと。話したら心配して止められそうで、相談せずに出かけました。 きっかけは、妹尾河童さんの本に描かれた細密な絵。「自分の目で見てみたい」という気持ちに、背中を押されました。 選んだのは、余裕のあるツアー。押しの強い人には弱い私には、じっと見られる視線もしんどくて。「ここでは暮らせないかも」と思いつつ、「気にしない」と観光を続けた、懐かしい旅の思い出です。 音楽はSunoを使ってAIで制作しました。画像にもAIを使用し、思い出をもとに想像を交えて描いています。 हिन्दी 『一冊の本から、こっそりインドへ』 एक किताब से, चुपके से भारत की ओर विश्वविद्यालय के तीसरे साल के बाद, चौथा शुरू होने से पहले, मैं माँ-पापा को बिना बताए भारत गई थी। तब उनसे अलग रहती थी। लगा, बताऊँगी तो चिंता करेंगे और शायद रोक लेंगे। प्रेरणा मिली कप्पा सेनोओ की एक किताब के बारीक चित्रों से। भारत को अपनी आँखों से देखने की इच्छा मुझे वहाँ ले गई। आराम से घूमने वाला टूर चुना था। कोई हावी होने लगे तो मैं जल्दी घबरा जाती हूँ; घूरती नज़रें भी मुश्किल लगती थीं। सोचा, “शायद यहाँ रह न पाऊँ,” लेकिन “ध्यान मत दो” कहकर घूमती रही। आज वह सफ़र एक प्यारी याद है। संगीत Suno की मदद से AI द्वारा बनाया गया है। चित्र भी AI से बने हैं और मेरी यादों में कल्पना मिलाकर तैयार किए गए हैं।