Suswani Mata ji ki Mahima Stuti माता जी की महिमा स्तुति #mata #story #motivation #suswani
Suswani Mataji
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Suswani Mataji
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श्री गणेशाय नमः श्री सुसवाणी माताय नमः
सर्व मंगलकारी, सर्वपाप हारी श्री सुसवाणी माताजी की
महिमा स्तुति
पंच परमेष्ठि को नमन, हो नित मंगल काम
जय गणेश, माँ शारदे, करके प्रथम प्रणाम
संबोधन गुरुदेव को लेकर इष्ट का नाम
सुसवाणी मन चित बसो, लाख लाख प्रणाम
सुसवाणी माँ आपका, ध्यान धरूँ दिन रात
महिमा वर्णन मैं करूं, रखना मेरी लाज
नव दुर्गा की ज्योत हो, शक्ति अपरंपार
मात तुम्हारे नाम का, त्रिभूवन में जयकार
जय जय माँ सुसवाणी माता
महिमा तेरी जग विख्याता
महामायी माँ शक्ति दाता
तुम हो सबकी, भाग्य-विधाता
मोरखाणां है तीर्थ प्यारा
शिव-शक्ति का संगम न्यारा
कैर बीच मन्दिर है तुम्हारा
सारी सृष्टि का रखवारा
सपने में मैया फरमाये
माल्हो जी को धन बतलाये
मन्दिर एक बनाओ मनोहर
सत्य-अहिंसा के खंबो पर
धाम बना पावन अति प्यारा
संकट मोचन, भव दुख हारा
जो श्रद्धा के दीप जलाये
उसको कष्ट कभी ना आये
पाकर निर्मल शीतल छाया
मरुधर की भी बदली काया
सिंह नाद झालर झिणकाता
गूंजे धरती अम्बर गाता
जिस धरती में मात समाई
देव तुल्य पावन कहलाई
नवमी को लगता जगराता
देव रमण धरती पे आता
रतन जड़ा सिंहासन तेरा
'चमके रूप दयामयी चेहरा
स्वर्ण थाल में दीपक बाती
पावन ज्योत जले दिन-राती
धवल - शिखर लहराये पताका
भक्तों का मन है ललचाता
भूत-पिशाच निकट नहीं आवे
जब जब तेरो ध्यान लगावे
जगदम्बे अवतार कहाती
दूर्गा रूप में आप सुहाती
अम्बे रूप में हो में हो ललचाती
पल में सौ-सौ रूप बनाती
दुष्टों से जब धरती कांपे
लाल अंगारे करती आंखे
इस जग के सब पाप मिटाती
दानव दल को मार भगाती
खड़ग खप्पर, त्रिशूल हाथ में
काला-गोरा, भैरूं साथ में
शंख चक्र हैं कर में साजे
डाकिन-शाकिन नाम से भागे
सम्वत् बारह सौ उन्नीस
आसोज शुक्ला की है बीज
नागीणां नगरी हरषाई
जनमी कन्या ईक सुखदाई
सुराणा कुल में अवतारी
सतीदास की पुत्री प्यारी
सूरदास को दिया जो परचा
वचन किया था अपना सच्चा
आयु जब दस की थी पाई
जब दुगड़ कुल में हुई सगाई
इक मुगला मन से पगलाया
शादी का संदेश भिजाया
सतीदास को जेल डलाया
खूब डराया और धमकाया
कन्या श्री अरिहन्त को ध्यायै
पुण्य कर्म से शिव-पथ पाये
दुष्ट के संग में दौड़ लगायी
सिंह सवारी माँ ने पायी
माँ को सिंह मोराणें लाया
मोरखाणे में शिव को पाया
शिव का ध्यान धरे महामायी
ध्यान से जागे शिव वरदायी
शिव ने चिमटा मार भगाया
शक्ति थल माँ को बतलाया
दुष्ट मुगल को को मार गिराया
उसके दल का किया सफाया
दाता- त्राता तूं जग माता
जय जय जय सुसवाणी माता
तेरी महिमा सबसे न्यारी
तीन भूवन में ख्याति भारी
तुम्हारे जो भी द्वार तुम्हारे आता
चिन्ता संकट सब मिट जाता
जब भी भक्त हैं द्वार पे आते
लापसी-चूरमां भोग लगाते
खूब मनाते, खूब रिझाते
सिर पर तेरे चँवर ढुलाते
जग जननी ज्योति कहलायी
वेदों ने भी महिमा महिमा गायी
मंगल मूरत रूप अनूपा
चमक रहा पूनम का चंदा
भाल तिलक है, नैन विशाला
गल में हार, मुक्त मणी माला
लाल दिखणी, चीर है प्यारा
जिस पर चमके झिलमिल तारा
सिर पर मुकुट लगे अति प्यारा
जगमग कानन कुण्डल न्यारा
चूड़ा-चूनड़ मेंहदी सोहे
सिंह सवारी मन को मोहे
चंदा जैसी शीतल धारा
कोटि सूर्य सम तेज तुम्हारा
अन्न धन से भंडार हो भरती
जन जन का तुम मंगल करती
निर्धन को धन देने वाली
सूनी गोद को भरने वाली
रोगी के सब रोग मिटाती
सबकी बाधा दूर भगाती
ममतामयी मूरत है प्यारी
भीड़ लगे दर्शन को भारी
द्वार तुम्हारे नौबत बाजे
बांध के घुंघरू भैंरु नाचे
आश्विन माह में आये मेला
भक्त जनों का आता रेला
कोई पैदल चलकर आते
कोई दंडवत धोक लगाते
छप्पन व्यंजन भोग लगाये
कोई मंगल - दीप जलाये
फूल इत्र सुगन्ध लगाते
जात झडूला भेंट चढ़ाते
सिंह चढी आती मदमाती
छन छन पायलिया छनकाती
भक्ति से शक्ति हो दिलाती
अन्न धन यश करुणां बरसाती
विद्या बुद्धि बल की दाता
आपका बल है जग विख्याता
मोरखाणें की महिमा भारी
दर्शन से पुलके नर-नारी
अंधन अखियां, कोढ़िन काया
जिसने चाहा, वैसा पाया
शरण में तेरी जो भी आता
तेरी दया का वर मिल जाता
मंगल करणी, संकट हरणी
तेरी महिमा जाये ना वरणी
जो नित तेरा करते सुमिरन
उनके संग सदा रहती तुम
अखिल भूवन की आप हो स्वामी
घट-घट वासी अन्तर्यामी
सुर नर , मुनिजन और संसारी
बोल रहे जय मात तुम्हारी
"धर्म धुरंधर " सेवा पाये
नित्य "हमीर" तेरे गुण गाये
करते जो गुणगान बड़ाई
उनका मान रखे तूं सवाई
तुम कल्याणी, तुम वरदानी
हम मूरख हैं और खल कामी
गलती माफ हमारी करना
अपनी शरण में हमको रखना