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Chalisa | क्षी माँ सुसवाणी चालीसा । Shree Maa Suswani Chalisa (Hindi Lyrics)

Suswani Mataji

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Chalisa | क्षी माँ सुसवाणी चालीसा । Shree Maa Suswani Chalisa (Hindi Lyrics)

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माँ सुसवाणी चालीसा जय जय जय सुसवाणी माता । भक्त चरण में शीश नवाता । नवनव ज्योत भक्त हितकारी । शरणागत की बाधा टारी ।२। नागौर नगर में जन्म लियौ माँ । सुराणा कुल को धन्य कियो माँ । सौम्यरूप ले माँ अवतरिया । अनगिन रुप माँ अम्बे धरिया ।४। दिव्यरूप माँ नैन विशाला । हिवड़े हार वैजयन्ति माला ।५। काना कुन्डल मुकुट अति सोहे । ब्रह्मा, विष्णु, शिव मन मोहे ।६। मेलो देखन माता पधारा संग सहेला लस्कर सारा ।७। दुष्ट मुगलो मन बुरी विचारी । दुष्ट मरो संग सेना सारी ।८। अत्याचारी को मात खपाया । ले त्रिशूल माँ किया सफाया ।९। चढ्या सिंह मोरखाणा आया । शक्ति स्थल शंकर से पाया ।१०। सब जन कैर का भाग सराया । कालजिये में मात् बसाया ।११। धन्य मात तू कैरां वाली दुष्ट संहारे बन मतवाली ।१२। कुल कर गरिमा जग में गूँजी । माँ की ममता सबसे ऊँची ।१३। बारह सों उन्नती से माता मही समाया । सहस्त्र दोय सों बत्तीसे प्रकट होय फिर आया । काकासा ने परचो दिन्यो आय मोराणे मन्दिर किन्यो ।१४। भाटयां से माँ वाचा किन्हा । पूजा मांग राजपद दिन्हा ।१५। माँ सुसवाणी सब दुख हरणी । कैरां वाली सब सुख करनी ।१६। तीनू लोकां नाम तिहारो शीतल नैना आप निहारो ।१७। आधि व्याधि निकट नहीं आवे । सुसवाणी को नाम सुनावे ।१८। धन्य कहत इन्द्रादिक देवा आय भक्त करै नित सेवा ।१९। दर्श करत दुख दारिद्र भागे । सोया भाग दर्श से जागे ।२०। खडग त्रिशूल माँ हाथ विराजे । संख चक्र गदा अति साजे ।२१। भूत पिशाच नाम से भागे डाकिनी-शाकिन थर-थर कांपे ।२२। चण्डी चामुण्डा वन गाजो भक्त बधावण बेगा आजो ।२३। साचे मन से माँ को धावे । सब सुख भोग अमर पद पावे ।२४। रैन निवारो हे जग माता । लक्ष्मी रूप माँ उस घर आवे ।२५। कष्ट निवारो हे जग माता । दयामयी अम्बे सुख दाता ।२६। सिंह वाहिनी प्राण उवारौ सब भक्तन के संकट टारो ।२७। तीन लोक में ज्योती चमके । कोटि सूर्य सम मुखमण्डल दमके ।२८। दीन दुखी तुझ द्वारे आवे वांछित फल माँ तुझसे पावे ।२९। सद बुद्धि भक्ति की दाता । दयामयी माँ जग विख्याता ।३०। ममतामयी माँ पुरो आशा मातृ चरण के हम हैं दासा ।३१। नव अवतार लक्ष्मी वन आया । नच परचा दे रंग लगाया ।३२। सुख शान्ति लक्ष्मी बन बरस्या । दीन दुखी माँ सव जन हरषा ।३३। तुम सम देव न दूजो दानी । कृपा करो माता सुसवाणी ।३४। जान कुपातर दया करीज्यो भक्तन का भण्डार भरीज्यो । ३५। धवल शिखर पर ध्वजा फरुखे । भक्त जन को हिवडो हरषे । ३६ । 'मान' हृदय में आप विराजो । याद करु जब वेगा आज्यो । ३७। मात दास को गले लगावे ऋद्धि सिद्धि बल बुद्धि पावे । ३८। सज श्रृंगार बहू बेटया आवे । गंठ जोड़ा की जात् दिरावै । ३९ । जात झडूला खूब चढ़ावे जातिड़ा जयकार बुलावे ।४०। शक्ति भक्ति सद बुद्धि को, माता देवो दान दास चरण को मान दुगड़, सदा करे गुणगान ।।