Chalisa | क्षी माँ सुसवाणी चालीसा । Shree Maa Suswani Chalisa (Hindi Lyrics)
Suswani Mataji
0:00 / 0:00
Chalisa | क्षी माँ सुसवाणी चालीसा । Shree Maa Suswani Chalisa (Hindi Lyrics)
965 просмотров · 2 г. назад
Suswani Mataji
3,18 тыс. подписчиков
965 просмотров · 2 г. назад
माँ सुसवाणी चालीसा
जय जय जय सुसवाणी माता ।
भक्त चरण में शीश नवाता ।
नवनव ज्योत भक्त हितकारी ।
शरणागत की बाधा टारी ।२।
नागौर नगर में जन्म लियौ माँ ।
सुराणा कुल को धन्य कियो माँ ।
सौम्यरूप ले माँ अवतरिया ।
अनगिन रुप माँ अम्बे धरिया ।४।
दिव्यरूप माँ नैन विशाला ।
हिवड़े हार वैजयन्ति माला ।५।
काना कुन्डल मुकुट अति सोहे ।
ब्रह्मा, विष्णु, शिव मन मोहे ।६।
मेलो देखन माता पधारा
संग सहेला लस्कर सारा ।७।
दुष्ट मुगलो मन बुरी विचारी ।
दुष्ट मरो संग सेना सारी ।८।
अत्याचारी को मात खपाया ।
ले त्रिशूल माँ किया सफाया ।९।
चढ्या सिंह मोरखाणा आया ।
शक्ति स्थल शंकर से पाया ।१०।
सब जन कैर का भाग सराया ।
कालजिये में मात् बसाया ।११।
धन्य मात तू कैरां वाली
दुष्ट संहारे बन मतवाली ।१२।
कुल कर गरिमा जग में गूँजी ।
माँ की ममता सबसे ऊँची ।१३।
बारह सों उन्नती से माता मही समाया ।
सहस्त्र दोय सों बत्तीसे प्रकट होय फिर आया ।
काकासा ने परचो दिन्यो
आय मोराणे मन्दिर किन्यो ।१४।
भाटयां से माँ वाचा किन्हा ।
पूजा मांग राजपद दिन्हा ।१५।
माँ सुसवाणी सब दुख हरणी ।
कैरां वाली सब सुख करनी ।१६।
तीनू लोकां नाम तिहारो
शीतल नैना आप निहारो ।१७।
आधि व्याधि निकट नहीं आवे ।
सुसवाणी को नाम सुनावे ।१८।
धन्य कहत इन्द्रादिक देवा
आय भक्त करै नित सेवा ।१९।
दर्श करत दुख दारिद्र भागे ।
सोया भाग दर्श से जागे ।२०।
खडग त्रिशूल माँ हाथ विराजे ।
संख चक्र गदा अति साजे ।२१।
भूत पिशाच नाम से भागे
डाकिनी-शाकिन थर-थर कांपे ।२२।
चण्डी चामुण्डा वन गाजो
भक्त बधावण बेगा आजो ।२३।
साचे मन से माँ को धावे ।
सब सुख भोग अमर पद पावे ।२४।
रैन निवारो हे जग माता ।
लक्ष्मी रूप माँ उस घर आवे ।२५।
कष्ट निवारो हे जग माता ।
दयामयी अम्बे सुख दाता ।२६।
सिंह वाहिनी प्राण उवारौ
सब भक्तन के संकट टारो ।२७।
तीन लोक में ज्योती चमके ।
कोटि सूर्य सम मुखमण्डल दमके ।२८।
दीन दुखी तुझ द्वारे आवे
वांछित फल माँ तुझसे पावे ।२९।
सद बुद्धि भक्ति की दाता ।
दयामयी माँ जग विख्याता ।३०।
ममतामयी माँ पुरो आशा
मातृ चरण के हम हैं दासा ।३१।
नव अवतार लक्ष्मी वन आया ।
नच परचा दे रंग लगाया ।३२।
सुख शान्ति लक्ष्मी बन बरस्या ।
दीन दुखी माँ सव जन हरषा ।३३।
तुम सम देव न दूजो दानी ।
कृपा करो माता सुसवाणी ।३४।
जान कुपातर दया करीज्यो
भक्तन का भण्डार भरीज्यो । ३५।
धवल शिखर पर ध्वजा फरुखे ।
भक्त जन को हिवडो हरषे । ३६ ।
'मान' हृदय में आप विराजो ।
याद करु जब वेगा आज्यो । ३७।
मात दास को गले लगावे
ऋद्धि सिद्धि बल बुद्धि पावे । ३८।
सज श्रृंगार बहू बेटया आवे ।
गंठ जोड़ा की जात् दिरावै । ३९ ।
जात झडूला खूब चढ़ावे
जातिड़ा जयकार बुलावे ।४०।
शक्ति भक्ति सद बुद्धि को, माता देवो दान
दास चरण को मान दुगड़, सदा करे गुणगान ।।