Samaysar Gatha 2 l समयसार गाथा 2 | स्वसमय और परसमय क्या है? | Acharya Kundkund l # Samaysaar
JaiJinedra
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Samaysar Gatha 2 l समयसार गाथा 2 | स्वसमय और परसमय क्या है? | Acharya Kundkund l # Samaysaar
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समयसार की दूसरी गाथा में आचार्य कुंदकुंद आत्मा के दो रूपों का रहस्य खोलते हैं — "स्वसमय" और "परसमय"। जो आत्मा अपने दर्शन-ज्ञान-चारित्र स्वभाव में टिकी है, वो स्वसमय है; और जो पुद्गल कर्म में उलझी है, वो परसमय है।
इस वीडियो में जानिए: ✅ समयसार गाथा 2 का मूल पाठ और अर्थ ✅ स्वसमय और परसमय का सरल उदाहरण सहित वर्णन ✅ "समयसार" नाम का असली मतलब क्या है ✅ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसे कैसे पहचानें
यह वीडियो जैन दर्शन, अध्यात्म और आत्म-ज्ञान में रुचि रखने वाले सभी दर्शकों के लिए है — चाहे आप श्रावक हों, विद्यार्थी हों, या आध्यात्मिक जिज्ञासु हों।
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📌 पिछली वीडियो: समयसार गाथा 1 — सिद्ध वंदना 📌 अगली वीडियो: समयसार गाथा 3 — एकत्व की सुंदरता
समयसार गाथा 1 : • समयसार गाथा 1 | Samaysaar Gatha 1 | सिद्ध ...
⚠️ Disclaimer
यह वीडियो धार्मिक, आध्यात्मिक एवं शैक्षिक उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इसमें दिए गए अर्थ, व्याख्या और प्रस्तुति का उद्देश्य जैन दर्शन एवं समयसार के भावों को सरल रूप में समझाने का प्रयास है। विभिन्न आचार्यों एवं टीकाकारों की व्याख्याओं में अंतर संभव है।
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समयसार का मूल धार्मिक साहित्य आचार्य कुन्दकुन्द की रचना है; यहाँ प्रस्तुत आधुनिक audio/visual presentation Jai Jinendra की original creative presentation है।
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