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ईक्ष्वाकु राजाओं की कथाएं-32 : सुतीक्ष्ण ऋषि ने भगवान को देखकर आंखें बंद कर लीं!

Stories From Hindu Dharma

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ईक्ष्वाकु राजाओं की कथाएं-32 : सुतीक्ष्ण ऋषि ने भगवान को देखकर आंखें बंद कर लीं!

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जब वनवासी तापसों ने सुतीक्ष्णजी की कुटिया में जाकर उन्हें सूचना दी कि श्रीराम आ रहे हैं तो सुतीक्ष्णजी अत्यंत भाव-विभोर हो गए। वे अपनी कुटिया से निकलकर मार्ग पर भागे ताकि श्रीराम की अगवानी कर सकें किंतु उन्हें मार्ग का ध्यान ही नहीं रहा इसलिए वे जहाँ-तहाँ भागने लगे। वनवासी तापसों ने मुनि सुतीक्ष्ण को पकड़कर स्थिर किया किंतु सुतीक्षणजी इतने व्यग्र थे कि उन्हें न तो कुछ सुनाई दे रहा था और न दिखाई दे रहा था।