मौत याद रखो, मौज साथ रखो || आचार्य प्रशांत (2019)
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मौत याद रखो, मौज साथ रखो || आचार्य प्रशांत (2019)
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वीडियो जानकारी: 24.09.2022, वेदांत महोत्सव, ग्रेटर नॉएडा
विवरण:
इस वीडियो में आचार्य जी ने मृत्यु के डर और जीवन के वास्तविक अर्थ पर गहन विचार प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने बताया कि मृत्यु का डर अक्सर अहंकार और भौतिकता से जुड़ा होता है। आचार्य ने स्पष्ट किया कि मृत्यु के समय व्यक्ति का अनुभव उसके जीवन के प्रति उसके दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।
उन्होंने कहा कि भौतिक मृत्यु से संबंधित चिंताएँ उसी प्रकार की होती हैं जैसे व्यक्ति अपने जीवन में अनुभव करता है। यदि व्यक्ति अपने जीवन को सही तरीके से जीता है, तो मृत्यु के समय भी वह शांति और मस्ती का अनुभव करेगा।
आचार्य ने यह भी बताया कि मृत्यु को एक अंत के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे जीवन के एक स्वाभाविक हिस्से के रूप में स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग अपने जीवन में अपने धर्म का पालन करते हैं, उनके लिए मृत्यु एक साधारण घटना बन जाती है।
आचार्य ने यह भी कहा कि मृत्यु के डर को दूर करने के लिए व्यक्ति को अपने जीवन में जागरूकता और सही दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि मृत्यु के समय व्यक्ति को अपने कर्मों का मूल्य चुकाना पड़ता है, और यह महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति अपने जीवन को सही तरीके से जीने का प्रयास करे।
प्रसंग:
~ भारत का विकास कैसे हो सकता है?
~ विकास का सही अर्थ क्या है?
~ किसीकी तरक्की कब माने?
~ विकास और वृद्धि में क्या अंतर है?
~ जीडीपी सही मापदंड है विकास का?
~ दुनिया की बड़ी समस्या क्या?
संगीत: मिलिंद दाते
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