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पहली दिवाली पर भाई अपनी बहन के ससुराल पहुंचा उपहार देने तो जो वहां उसने देखा

Sip and Talk 1.1m

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पहली दिवाली पर भाई अपनी बहन के ससुराल पहुंचा उपहार देने तो जो वहां उसने देखा

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पहली दिवाली पर भाई अपनी बहन के ससुराल पहुंचा उपहार देने तो जो वहां उसने देखा पिता की तेरहवीं वाले दिन उसने अपनी बहन के सिर पर हाथ रखकर कहा था, "सिम्मी, तू फ़िक्र मत कर। जब तक तेरा भाई ज़िंदा है, तुझे किसी चीज़ की कमी नहीं होने दूँगा। तेरी शादी ऐसी करूँगा कि सारा मोहल्ला याद रखेगा।" सिम्मी रोते-रोते बोली थी, "वीरे, मुझे शादी-वादी नहीं चाहिए। मुझे बस आप और बीजी चाहिए।" लेकिन बेटियाँ तो पराया धन होती हैं, दोस्तों। एक दिन उन्हें अपने बाबुल का आँगन छोड़कर जाना ही पड़ता है। सिम्मी पढ़ी-लिखी, सुशील और बेहद समझदार लड़की थी। बारहवीं के बाद उसने सिलाई-कढ़ाई का कोर्स किया था, और मोहल्ले की औरतों के सूट सिलकर अपना जेब-खर्च खुद निकाल लेती थी। उसके हाथ में ऐसा हुनर था कि जो भी उसके सिले कपड़े पहनता, तारीफ़ करते नहीं थकता था। एक दिन गोपी की फैक्ट्री के मालिक ने उसे बताया कि लुधियाना से करीब चालीस किलोमीटर दूर, भगवानपुरा गांव में एक अच्छा परिवार है। सरदार बलदेव सिंह, खेती-बाड़ी वाले, ज़मीन भी है, इज़्ज़त भी है। उनका इकलौता बेटा है, परमजीत, जिसे सब "पम्मा" कहते हैं। लड़का मेहनती है, खेती भी संभालता है और साथ में ट्रैक्टर-ट्रॉली किराए पर भी चलाता है। गोपी बीजी को लेकर रिश्ता देखने गया। गांव पहुँचा तो देखा, कच्ची-पक्की गलियाँ, खेतों में लहलहाती सरसों, और घर के आँगन में बँधी भैंसें। बलदेव सिंह ने पगड़ी संभालते हुए बड़े प्यार से कहा, "पुत्तर, हमें लड़की चाहिए, दहेज नहीं। बस लड़की संस्कारी हो।" motivational story moral story in hindi hindi kahaniyan online hindi stories storyteller bedtime stories viral story #familystory​  #socialstory​ #moralstories​  #punjabistories​  #kahani​ #bedtimestories​ #kahaniya​ #viralstory​ #hindi literature ​ #trendingstory​  #viralstory​ #storytelling please support