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चंद्रमा के साथ तिल-तिल बढ़ता-घटता है हरिद्वार का प्राचीन तिलभाण्डेश्वर शिवलिंग | Tilak Patrika 🙏

Tilak Patrika

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चंद्रमा के साथ तिल-तिल बढ़ता-घटता है हरिद्वार का प्राचीन तिलभाण्डेश्वर शिवलिंग | Tilak Patrika 🙏

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#Uttrakhand #Haridwar #TilbhandeshwarTemple उत्तराखंड के हरिद्वार में कई ऐसे प्राचीन मंदिर स्थापित हैं, जो रहस्यमयी (Rahasyamay) और चमत्कारी (Chamatkari) विशेषताओं के कारण भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हरिद्वार की प्राचीन नगरी कनखल (Kankhal) में स्थित तिलभाण्डेश्वर मंदिर (Tilbhandeshwar Mandir) सती घाट (Sati Ghat) पर गंगा (Ganga) के किनारे स्थापित है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां स्थापित शिवलिंग (Shivling) हर महीने कृष्ण पक्ष (Krishna Paksh) में 15 दिन तिल-तिल घटता है और शुक्ल पक्ष (Shukla Paksh) में 15 दिन तिल-तिल बढ़ता है। पूर्णिमा (Poornima) के दिन शिवलिंग अपने पूर्ण स्वरूप में नजर आता है। शिवपुराण (Shiv Puran) में तिलभाण्डेश्वर मंदिर का वर्णन मिलता है। मान्यताओं के अनुसार, जब माता सती (Mata Sati) ने अपनी देह का त्याग किया, तब भगवान शिव (Shiv) ने इस स्थान पर अपने महाकाल (Mahakal) रूप को छोटा किया और इसी स्थान पर ऋषि भाण्डव (Rishi Bhandav) ने कठोर तपस्या (Tapasya) की थी। मंदिर में जो भक्त सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करते हैं, उनके दुःख तिल-तिल करके कम होने लगते हैं। 40 दिन तक लगातार शिवलिंग पर जलाभिषेक (Jalabhishek) और पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तिलक पत्रिका पर देखें हमारे हरिद्वार संवाददाता आशु शर्मा की यह विशेष रिपोर्ट। तिलक पत्रिका" एक अनूठा समाचार चैनल जो 24x7 प्रस्तुत करता है भारत के धार्मिक स्थलों की खबरें व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां। इस चैनल के माध्यम से आप जुड़ते हैं भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के साथ। यहां आप हर दिन हर क्षण देख सकते हैं भारतीय मंदिरों और तीर्थ स्थलों की नवीनतम और महत्वपूर्ण खबरें। यह चैनल आपको समाचारों के साथ-साथ भारतीय धार्मिक स्थलों के आलौकिक दर्शन का अद्वितीय अनुभव भी प्रदान करता है, जिससे आप ईश्वर की विभिन्न महिमाओं के बारे में भी जानते हैं। "तिलक पत्रिका" में प्रस्तुत होने वाली हर खबर से जुड़ा है उस धार्मिक स्थल का इतिहास, महत्व और मान्यताएं, जिससे आप उस स्थल की अद्भुतता को भी समझते है। साथ ही यहां आप देखते हैं लाइव पूजा, आराधना और धार्मिक आयोजनों की विवरणात्मक रिपोर्टिंग भी...तो धर्मस्थलों की समस्त जानकारियां व नवीनतम समाचार लाइव एवं वीडियो के माध्यम से सबसे पहले देखने के लिए आज ही जुड़़िये "तिलक पत्रिका" के साथ!