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108 नरमुंडों पर बना लाखों वर्ष प्राचीन तंत्र साधना का स्थान दक्षिण काली मंदिर हरिद्वार की कहानी

Tilak Patrika

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108 नरमुंडों पर बना लाखों वर्ष प्राचीन तंत्र साधना का स्थान दक्षिण काली मंदिर हरिद्वार की कहानी

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#Uttrakhand #Haridwar #DakshinKaliTemple हरिद्वार में नील पर्वत (Neel Parvat) के कजरी वन की तलहटी पर गंगा (Ganga) किनारे सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर (Dakshin Kali Mandir) स्थापित है। मंदिर की स्थापना भगवान शिव (Shiv) के परम उपासक बाबा कामराज (Baba Kamraj) ने की थी, और यह मंदिर सतयुगी (Satyug) काल से स्थापित है। इसी मंदिर से कोलकाता (Kolkata) के काली मठ (Kalimath) के लिए अखंड ज्योति (Akhand Jyoti) ले जाई गई थी, उसके बाद ही कोलकाता में काली मठ की स्थापना हुई। मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को तंत्र साधना (Tantra Sadhna) का पहला महा साधक माना जाता हैं। पृथ्वी पर बाबा कामराज तंत्र साधना के पहले साधक हैं। बाबा कामराज को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर दक्षिण काली के दिव्य दर्शन कराए और उनको मंदिर की स्थापना का निर्देश दिए। बाबा कामराज ने यहां लुप्त हुई दक्षिण कालीपीठ को जागृत करने के लिए नीलधारा गंगा (Nildhara Ganga) क्षेत्र में स्थित श्मशान (Shamshan) से 108 शवों को पुनर्जीवित किया और उनके नर मुंडों (Narmund) की बलि चढ़ाई, तब यह कालीपीठ जागृत हुआ। बाबा कामराज को अमर माना जाता हैं, वे हिमालय (Himalaya) में कठोर साधना (Sadhna) में लिप्त रहते हैं, और रात्रि में सूक्ष्म शरीर के माध्यम से दक्षिण काली मंदिर में उपासना (Upasna) के लिए आते हैं। मंदिर में मां काली का मुख पूर्व दिशा में है, और मां गंगा की पावन धारा दक्षिण की और है। यानी यहां पर गंगा दक्षिणी वाहिनी है। इसलिए इस मंदिर को दक्षिण काली मंदिर के नाम से जाना जाता है। अघोर, (Aghor) तंत्र साधना के लिए दक्षिण काली मंदिर प्रमुख माना जाता है। तिलक पत्रिका पर देखें हमारे हरिद्वार संवाददाता आशु शर्मा की यह विशेष रिपोर्ट। तिलक पत्रिका" एक अनूठा समाचार चैनल जो 24x7 प्रस्तुत करता है भारत के धार्मिक स्थलों की खबरें व अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां। इस चैनल के माध्यम से आप जुड़ते हैं भारतीय सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के साथ। यहां आप हर दिन हर क्षण देख सकते हैं भारतीय मंदिरों और तीर्थ स्थलों की नवीनतम और महत्वपूर्ण खबरें। यह चैनल आपको समाचारों के साथ-साथ भारतीय धार्मिक स्थलों के आलौकिक दर्शन का अद्वितीय अनुभव भी प्रदान करता है, जिससे आप ईश्वर की विभिन्न महिमाओं के बारे में भी जानते हैं। "तिलक पत्रिका" में प्रस्तुत होने वाली हर खबर से जुड़ा है उस धार्मिक स्थल का इतिहास, महत्व और मान्यताएं, जिससे आप उस स्थल की अद्भुतता को भी समझते है। साथ ही यहां आप देखते हैं लाइव पूजा, आराधना और धार्मिक आयोजनों की विवरणात्मक रिपोर्टिंग भी...तो धर्मस्थलों की समस्त जानकारियां व नवीनतम समाचार लाइव एवं वीडियो के माध्यम से सबसे पहले देखने के लिए आज ही जुड़़िये "तिलक पत्रिका" के साथ!