Перейти к содержимому

न्याय एवं अधिकार की बहस पर... Vaishali Thapa Poetry | Aaj Ki Kavita | Sanjeev Paliwal | Sahitya Tak

Sahitya Tak

0:00 / 0:00

न्याय एवं अधिकार की बहस पर... Vaishali Thapa Poetry | Aaj Ki Kavita | Sanjeev Paliwal | Sahitya Tak

605 просмотров · 13 часов назад
Sahitya Tak
3,42 млн подписчиков
605 просмотров · 13 часов назад
उसने कहा वो इसलिए नहीं हँसती क्योंकि उदास रहने पर उसके होंठ ख़ूबसूरत लगते हैं हँसने पर उसके होंठ ग़ायब हो जाते हैं पर उदासी ग़ायब नहीं होती जब उससे पूछा क्या तुम आस्तिक हो तब वो अपने प्रेमी को याद करती है और कहती है जब वो बहुत ज़्यादा ख़ुश होता है तो मुझे भूल जाता है जैसे कि मैं उसका ईश्वर हूँ उसने स्मृति के बारे में बताया उसने अपना शहर छोड़ दिया है और क्योंकि घर शहर के अंदर था तो घर भी छूट गया घर के अंदर की दुनिया थी बस जो नहीं छूटी व्यक्ति के बारे में बताते हुए वह कहती है कि वह एक यात्री है वह चुप की यात्रा करती है और शब्दों तक पहुँचती है व्यक्ति तक नहीं समाज और अधिकार के नाम पर वह खीज जाती है वह बताती है कि उसने अपना बहुत सारा समय बर्बाद किया है न्याय एवं अधिकार की बहस पर वह समझ चुकी है कि अधिकार बहस से नहीं मिलते क़दम उठाने से मिलते है जीवन के बारे में कहती है अब वह ठीक उस प्रकार जीना चाहती है जिस प्रकार वह जी सकती है वह अपने मन के लोकतंत्र की आज़ादी चाहती है वह अब चाहती है पूर्णतः अपने व्यवहार में बने रहना प्रेम के बारे में पूछने पर वह कुछ देर चुप हो जाती है एक गहरी उसाँस के बाद वह प्रेम के बारे में कुछ नहीं कहती चाय बनाने के लिए रसोई में चली जाती है आत्मा के बारे में बताती है अपनी आत्मा को मार कर अब वह अपने प्रति धारणाएँ पैदा नहीं करती उसको ख़ुद में अब कुछ नज़र नहीं आता बदलने के लिए। आज की कविता में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक संजीव पालीवाल से सुनिए वैशाली थापा की बेहतरीन कविता. #vaishalithapa #aajkikavita #poetry #sanjeevpaliwal #sahityatak About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. ............................ Links: Facebook:   / sahityatakofficial   Instagram:   / sahityatak   Twitter:   / sahitya_tak