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Jaishankar Prasad के निबंधों से उजागर समाज और हिंदी साहित्य की पूरी दुनिया | EP 1597 | Sahitya Tak

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Jaishankar Prasad के निबंधों से उजागर समाज और हिंदी साहित्य की पूरी दुनिया | EP 1597 | Sahitya Tak

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जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के उन महत्वपूर्ण रचनाकारों में हैं, जिन्होंने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास और निबंध जैसी विधाओं को अपनी विशिष्ट दृष्टि से समृद्ध किया. पल्लव द्वारा संपादित पुस्तक ‘हिन्दी के प्रारंभिक निबंधकार : जयशंकर प्रसाद’ जयशंकर प्रसाद के निबंध-साहित्य, उनके साहित्यिक विचारों और हिंदी भाषा-साहित्य को लेकर उनकी दृष्टि को सामने लाती है. यह पुस्तक हिंदी के प्रारंभिक निबंधकारों की परंपरा और जयशंकर प्रसाद के बहुआयामी रचनात्मक व्यक्तित्व को समझने का महत्वपूर्ण प्रयास है. इस पुस्तक में ‘काव्य और कला’, ‘रहस्यवाद’, ‘रंगमंच’, ‘आरंभिक पाठ्य काव्य’, ‘यथार्थवाद और छायावाद’, ‘प्राचीन आर्यावर्त प्रथम सम्राट इंद्र’, ‘आदि पुरुष’, ‘चंपू कविता’, ‘रसास्वाद’, ‘कवि और कविता’, ‘हिंदी में नाटक का स्थान’ तथा निराला की कविता पर जयशंकर प्रसाद के अभिमत जैसे महत्वपूर्ण निबंध शामिल हैं. इन निबंधों के माध्यम से साहित्य, काव्य, नाटक, भारतीय संस्कृति, इतिहास, रहस्यवाद और हिंदी भाषा से जुड़े प्रसाद के विचारों को समझने का अवसर मिलता है. इस वीडियो में जयशंकर प्रसाद के साहित्यिक व्यक्तित्व, उनके निबंधों की विषय-वस्तु, छायावाद और यथार्थवाद, भारतीय साहित्यिक परंपरा, मनु और मानवता की कथा, चंपू काव्य तथा हिंदी भाषा और साहित्य के स्वरूप जैसे विषयों पर चर्चा की गई है. साथ ही यह भी बताया गया है कि प्रसाद ने कवि के साथ-साथ नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार और निबंधकार के रूप में हिंदी साहित्य को किस तरह समृद्ध किया. आज की किताब - ‘हिन्दी के प्रारंभिक निबंधकार : जयशंकर प्रसाद’ संपादक - डॉ. पल्लव विधा - निबंध-साहित्य भाषा - हिंदी प्रकाशक - सस्ता साहित्य मण्डल प्रकाशन पृष्ठ संख्या - 158 मूल्य - ₹250 साहित्य तक के कार्यक्रम ‘बुक कैफे’ के अंतर्गत ‘एक दिन एक किताब’ में वरिष्ठ पत्रकार जय प्रकाश पाण्डेय से सुनिए इस महत्वपूर्ण पुस्तक पर रोचक चर्चा. अगर आपको किताबें और साहित्यिक विमर्श पसंद है, तो इस प्रस्तुति को जरूर देखें. #pallav #jaishankarprasad #bookreview #bookcafe #ep1597 #jaiprakashpandey #sahityatak About the Channel Sahitya Tak आपके पास शब्दों की दुनिया की हर धड़कन के साथ I शब्द जब बनता है साहित्य I वाक्य करते हैं सरगोशियां I जब बन जाती हैं किताबें, रच जाती हैं कविताएं, कहानियां, व्यंग्य, निबंध, लेख, किस्से व उपन्यास I Sahitya Tak अपने दर्शकों के लिये लेकर आ रहा साहित्य के क्षेत्र की हर हलचल I सूरदास, कबीर, तुलसी, भारतेंदु, प्रेमचंद, प्रसाद, निराला, दिनकर, महादेवी से लेकर आज तक सृजित हर उस शब्द की खबर, हर उस सृजन का लेखा, जिससे बन रहा हमारा साहित्य, गढ़ा जा रहा इतिहास, बन रहा हमारा वर्तमान व समाज I साहित्य, सृजन, शब्द, साहित्यकार व साहित्यिक हलचलों से लबरेज दिलचस्प चैनल Sahitya Tak. तुरंत सब्स्क्राइब करें व सुनें दादी मां के किस्से कहानियां ही नहीं, आज के किस्सागो की कहानियां, कविताएं, शेरो-शायरी, ग़ज़ल, कव्वाली, और भी बहुत कुछ I Sahitya Tak - Welcome to the rich world of Hindi Literature. From books to stories to poetry, essays, novels and more, Sahitya Tak is a melting pot where you will keep abreast of what's the latest in the field of literature. We also delve into our history and culture as we explore literary gems of yesteryears from Surdas, Kabir, Tulsi, Bhartendu, Premchand, Prasad, Nirala, Dinkar, Mahadevi, etc. To know more about how literature shapes our society and reflects our culture subscribe to Sahitya Tak for enriching stories, poems, shayari, ghazals, kawali and much more. Subscribe Sahitya Tak now. ............................ Links: Facebook:   / sahityatakofficial   Instagram:   / sahityatak   Twitter:   / sahitya_tak