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कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ | उत्तम आर्जव धर्म | दशलक्षण पर्व तृतीय दिवस

Jinbhakt

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कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ | उत्तम आर्जव धर्म | दशलक्षण पर्व तृतीय दिवस

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Jinbhakt
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🙏 जय जिनेन्द्र 🙏 दशलक्षण पर्व के तृतीय दिवस पर समर्पित यह भक्तिमय प्रस्तुति “उत्तम आर्जव धर्म” हमें जीवन में सरलता, निष्कपटता और सत्यनिष्ठा का महत्व समझाती है। आर्जव का अर्थ है — मन, वचन और कर्म की एकरूपता। जब हमारे भीतर और बाहर कोई भेद नहीं रहता, तब आत्मा का वास्तविक प्रकाश प्रकट होने लगता है। यही कारण है कि जिनवाणी आर्जव धर्म को आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग की महत्वपूर्ण सीढ़ी बताती है। इस भजन में कपट, छल, दिखावे और कुटिलता को त्यागकर सरल एवं निष्कपट जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है। दर्पण की भाँति निर्मल बनने, बालक जैसी सरलता अपनाने तथा आत्मस्वरूप की पहचान करने का संदेश इस रचना में समाहित है। उत्तम आर्जव धर्म हमें सिखाता है कि सच्चा धर्म बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि अंतर्मन की सच्चाई में निवास करता है। दशलक्षण पर्व आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आत्मकल्याण का महान अवसर है। आइए, इस तृतीय दिवस पर हम सभी आर्जव धर्म को अपने जीवन में धारण करने का संकल्प लें और जिनेन्द्र भगवान के बताए मोक्षमार्ग पर अग्रसर हों। 📜 Lyrics: दशलक्षण का तृतीय दिवस है, मंगल भाव जगाने आया। उत्तम आर्जव धर्म का सूरज, अंतर्मन में छाने आया॥ मन जैसा हो वैसा दिखे, ऐसा जीवन बन जाए। कपट-कुटिलता दूर हटे तो, आत्मप्रकाश जगमगाए॥ मुख पर कुछ, मन में कुछ और, छोड़ो माया का यह दौर॥ सच्चाई को ढाल बनाओ, जीवन अपना सहज बनाओ॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ टेढ़े मन से टेढ़ी बातें, टेढ़े होते जाते काम। कपट भरे जब अंतर होते, मिट जाता है सारा नाम॥ दुनिया को धोखा दे लेना, शायद संभव हो जाए। लेकिन अपने अंतरमन को, कौन कभी छल पाए॥ दर्पण जैसा निर्मल बनना, यही धर्म की पहचान। मन, वचन और कर्म मिलें जब, खिलता सच्चा आत्मज्ञान॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ बालक जैसा सरल हृदय हो, द्वेष न हो व्यवहारों में। छल की छाया पास न आए, अपने विचारों में॥ मीठी वाणी केवल बाहर, भीतर यदि विष भरा रहे। तो फिर कैसा धर्म कहाएँ, कैसा जीवन खरा रहे॥ सरल भाव की छोटी धारा, सागर जैसी बन जाती। एक निष्कपट दृष्टि जीवन में, शांति नई भर जाती॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ मुख पर कुछ, मन में कुछ और, छोड़ो माया का यह दौर॥ सच्चाई को ढाल बनाओ, जीवन अपना सहज बनाओ॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ आर्जव केवल बोल नहीं है, यह तो अंतर की स्थिति। राग-द्वेष की गांठें खोलो, यही धर्म की प्रगति॥ कपट हजारों जन्म घुमाए, सीधा भाव घर पहुँचाए। जो जैसा है वैसा दिख जाए, आत्मस्वरूप निकट ले आए॥ नाटक जितने कम हो जाएँ, उतना जीवन सरल बने। अंतर की सच्चाई जागे, उतना ही मंगल फल मिले॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ व्यापारी भी सत्य रखे तो, धर्म वहीं पर आ जाता। गृहस्थी में सरल बने जो, जीवन सफल बन जाता॥ गुरु के सम्मुख झूठ न बोल, स्वयं से भी न छिप पाए। आत्मदोष को देख सके जो, वही आगे बढ़ पाए॥ दूसरों को क्या समझाना, पहले खुद को पहचानो। कपट छोड़कर सरल बनो तो, निज आत्मा को जानो॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ मुख पर कुछ, मन में कुछ और, छोड़ो माया का यह दौर॥ सच्चाई को ढाल बनाओ, जीवन अपना सहज बनाओ॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ सीधी राह कठिन लगती है, लेकिन सुखद परिणाम। कुटिल मार्ग आकर्षक दिखता, देता केवल विराम॥ जिनवर का संदेश यही है, सरल हृदय अपनाना। आर्जव धर्म के पावन पथ पर, आतम दीप जलाना॥ आज दशलक्षण के इस दिन, हम सब यह संकल्प करें। भीतर-बाहर एक रहेंगे, सरल धर्म को हृदय धरें॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ न कपट रहे, न छल रहे, न झूठा कोई रूप रहे। जैसा अंतर वैसा बाहर, यही धर्म का स्वरूप रहे॥ मन निर्मल हो, भाव सरल हो, वाणी मधुर विचार सरल। आर्जव की ज्योति जलाकर, आतम हो जाए उज्ज्वल॥ मुख पर कुछ, मन में कुछ और, छोड़ो माया का यह दौर॥ सच्चाई को ढाल बनाओ, जीवन अपना सहज बनाओ॥ कपट मिटाओ, सत्य अपनाओ, आतम-पथ पर बढ़ते जाओ॥ आर्जव ही है सच्चा सार, कर दे जीवन भव से पार॥ दशलक्षण का तृतीय दिवस, सरलता का उपहार। उत्तम आर्जव धर्म से, हो जीवन उद्धार॥ 🙏 यदि यह प्रस्तुति आपको पसंद आए तो वीडियो को LIKE करें, SHARE करें, COMMENT में अपने भाव लिखें और JinBhakt चैनल को SUBSCRIBE अवश्य करें। #UttamAarjav #DaslakshanParva #Daslakshan2026 #AarjavDharma #JainBhajan #Jainism #DigambarJain #JainDharm #JainDevotional #JainFestival #JinBhakt #JainSongs #BhaktiGeet #JainCulture #JainSpirituality