भगवती श्री काली का रहस्य | मधु-कैटभ वध और महामाया की योगनिद्रा | सनातन शक्ति
moti singh Rathore
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भगवती श्री काली - सनातन शक्ति महामाया
सनातन शक्ति जगदम्बा ही महामाया हैं। वे ही सबके मन को मोह में डाल देती हैं। उनकी माया से ब्रह्मादि देवता भी परम तत्त्व को नहीं जान पाते।
वे ही सत्त्व, रज, तम गुणों से सृष्टि, पालन और संहार करती हैं।
कथा - मधु-कैटभ वध:
प्रलयकाल में विष्णु जी शेषशय्या पर योगनिद्रा में थे। उनके कानों के मल से दो असुर - मधु और कैटभ - उत्पन्न हुए, प्रलय सूर्य जैसे तेजस्वी, विकराल जबड़ों वाले। वे ब्रह्मा जी को मारने चले।
ब्रह्मा जी ने महामाया की स्तुति की - "अम्बिके! इन्हें मोहित कर मेरी रक्षा करो और नारायण को जगाओ।"
फाल्गुन शुक्ला द्वादशी को त्रैलोक्य-मोहिनी शक्ति के रूप में महाविद्या काली आकाश में प्रकट हुईं - "कमलासन डरो मत, मैं तुम्हारे संकट हरूंगी।"
वे विष्णु के नेत्र, मुख, नासिका, बाहु से निकलकर सामने आईं, विष्णु जी जागे। 5000 वर्षों तक घोर युद्ध हुआ। अंत में महामाया से मोहित होकर असुरों ने वर मांगने को कहा।
विष्णु ने वर मांगा - "तुम्हारी मृत्यु मेरे हाथों हो।" असुरों ने सोचा जल में सब डूबा है, सूखी जगह मांगते हैं तो नहीं मरेंगे - बोले "जहाँ जल से भीगी धरती न हो वहाँ मारो।"
विष्णु ने अपनी जांघ पर रखकर चक्र से उनके मस्तक काट दिए। महाकाली की कृपा से बुद्धि भ्रमित होने से उनका अंत हुआ।
दुर्गा सप्तशती कहती है:
"ज्ञानिनामपि चेतांसि देवि भगवती हि सा। बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥"
दैविक प्रवृति की रक्षा के लिए माता आसुरी चित्त को मोह में डाल देती हैं, और आसुरी लोग अपना विनाश स्वयं चुन लेते हैं।
सीख: सात्विक आहार, करुणा को चुनो। तामसिक भोजन त्यागो।
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