70 साल की धम्मक्रांति… क्या बदली हमारी सोच और सामाजिक व्यवस्था? #buddhism | Rajendra Fule #ambedkar
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धम्मक्रांति के 70 साल
Reconstruction of World - बुद्ध धम्म से विश्व के पुनर्निर्माण का संकल्प
दुनिया बदलनी है तो पहले मनुष्य की सोच...चरित्र और सामाजिक व्यवस्था बदलनी होगी
14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में बाबासाहेब डॉ आंबेडकर ने धम्मक्रांति की
मनुष्य की चेतना का पुनर्निर्माण आवश्यक है
बाबासाहेब के विचारों को आचरण में उताराना होगा
अपने वर्तमान का ईमानदार मूल्यांकन करे
इतिहास का उद्देश्य गौरवगान ही नहीं, स्व-अनुभूति भी होता है
सामाजिक पहचान के कारण किसी को छोटा समझा जाए तो आधुनिकता का दावा खोखला है
'बुद्ध का धम्म' अज्ञान को पहचानने तथा उससे मुक्त होने की दिशा देता है
विश्व का पुनर्निर्माण पूर्वाग्रहों को बदलने से शुरू होता है
बाबासाहेब का सामाजिक दर्शन स्वतंत्रता-समानता-बंधुत्व के आदर्शों से जुड़ा है
बंधुत्व के बिना समानता तथा स्वतंत्रता को सामाजिक जीवन में टिकाए रखना कठिन हो जाता है
'धम्म' शब्दों में नहीं, व्यवहार में दिखाई देना चाहिए
'शिक्षा' मनुष्य को स्वतंत्र विचार करने योग्य बनाने की शक्ति है
तर्क कीजिए, पढ़िए और अपने निष्कर्षों की समीक्षा कीजिए
धम्म का अभ्यास करुणा-संयम-जिम्मेदारी और मैत्री के रूप में दिखाई देना चाहिए
संगठन का अर्थ है प्रज्ञावान-अनुशासित-उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्ध समुदाय बनाना