Your Purpose in Life — गीता के अनुसार अपना कर्म पहचानो | 18.47–48
Bhagvat Geeta Se Samadhan
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Your Purpose in Life — गीता के अनुसार अपना कर्म पहचानो | 18.47–48
19 просмотров · 13 дней назад
Bhagvat Geeta Se Samadhan
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क्या आपको नहीं पता कि आपकी असली मंज़िल क्या है? क्या करियर को लेकर उलझन है,
और लगता है कि जो कर रहे हैं वो शायद सही राह नहीं है? भगवद्गीता के अंतिम अध्याय
में श्रीकृष्ण ने इस उलझन का बहुत गहरा और व्यावहारिक जवाब दिया है — श्लोक
18.47-48 में।
इस वीडियो में जानेंगे:
स्वधर्म और परधर्म में क्या फर्क है
क्यों हर काम में कुछ न कुछ खामी होती ही है
दूसरों का रास्ता हमेशा बेहतर क्यों दिखता है
अपने असली रास्ते को पहचानने का व्यावहारिक तरीका
श्लोक (18.47-48):
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्॥
सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।
सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः॥
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बताएं — क्या आप भी अपने करियर को लेकर उलझन में हैं?
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