Adhuraa Ishq By Vidit Bharatkumar Shah
Vidit Bharatkumar Shah
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Adhuraa Ishq By Vidit Bharatkumar Shah
68 просмотров · 11 дней назад
Vidit Bharatkumar Shah
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मोहब्बत दिल से की जाए,
तो इंतज़ार छोटा लगता हैं।
निभाने वाले तो 'अंतिम'
कब्र में भी इंतज़ार करते हैं।
दूरियां है तो कुछ कह नहीं पाता हु,
के तुझसे में कितना प्यार करता हु।
मुलाकात को 'अंतिम' रोज़ तड़पता हु।
तुझे याद करके पल पल आहे भरता हु॥
ए ख़ुदा ये क्यों अधूरे इश्क़ से नवाज़ा है,
नसीब में लिखा तो हमसफर क्यों नहीं?
क्यों उसके बिना जीने को मजबूर किया,
क्यों रोज मैं तिल तिल करके मरता हु॥
मुलाकात को 'अंतिम' रोज़ तड़पता हु।
तुझे याद करके पल पल आहे भरता हु॥
इक मन की तुझे कह नहीं पाता हु,
शब्द बोल लेता हु, बयाँ कर नहीं पाता हु।
देखने भर से मन को मना लेता हु 'अंतिम',
खुदा से तेरे जल्दी आने की गुहार करता हु॥
दूरियां है तो कुछ कह नहीं पाता हु,
के तुझसे में कितना प्यार करता हु॥
--विदित भरतकुमार शाह'अंतिम'