Перейти к содержимому

Bepanaah Ishqq by Vidit Bharatkumar Shah

Vidit Bharatkumar Shah

0:00 / 0:00

Bepanaah Ishqq by Vidit Bharatkumar Shah

41 просмотр · 8 дней назад
Vidit Bharatkumar Shah
88 подписчиков
41 просмотр · 8 дней назад
Copyright content under the name of Vidit Bharatkumar Shah from year 2026. उसको मेरा कायल बना देता तो अच्छा था, या तो मुझे तू पागल बना देता तो अच्छा था। टूटी हिम्मत, बिखरा सपना, बुझी हुई उम्मीद, या ख़ुदा, मौत को मुकम्मल बना देता तो अच्छा था॥ ख्वाहिश-ए-आसमान में ऐ 'अंतिम', देख मेरे हौसलों का अंजाम यही है। गुलिस्ताँ तो बड़ा ही उम्दा है, मगर, किस्मत में गुलों का खिलना नहीं है॥ मैं हो भी जाऊं पत्थर तो क्या, वक्त ना बदला है न बदल पाएगा। हाथों की लकीरों में तू है, मगर, किस्मत में हमारा मिलना नहीं है॥ होने को तो हो जाऊँ मैं भी बेपरवाह, ज़ालिम या पत्थरदिल होना क्या सही है? बस एक इस ख़्याल ने रोक रखा है मुझे, ऐ जान, कि इस दिल में तेरा मकान यही है॥ आ कर देख तो एक बार हालत मेरी, तेरे बिन बता किस तरह जी रहा हूँ मैं। मैं मुसाफ़िर हूँ उस राह का ऐ 'अंतिम', जिस पर तेरे सिवा कोई रहबर नहीं है॥ — विदित भरतकुमार शाह 'अंतिम' #viditbshah #antim #heartbrrak #sadshayri #sadsong