दियरी और पुरवइया | राम भरोसे | Diyari Aur Purvaiya | Diwali Bhajan 2026
Bhajan Ghat Official
0:00 / 0:00
दियरी और पुरवइया | राम भरोसे | Diyari Aur Purvaiya | Diwali Bhajan 2026
48 просмотров · 4 дн. назад
Bhajan Ghat Official
433 подписчика
48 просмотров · 4 дн. назад
एक छोटी-सी माटी की दियरी और एक ज़िद्दी पुरवइया। हवा कहती है "बुझ जा", दियरी कहती है "मैं तो राम भरोसे"। 🪔
An original Hindi bhajan from Bhajan Ghat. A small clay lamp stands on a village doorstep at night while the east wind (purvaiya) tries every trick, from boasting to storm to rain, to put it out. The lamp answers with one line: "I burn on Ram's trust." A slow, quiet song for the nights before Diwali.
Lyrics / बोल:
जोर लगा ले री पुरवइया, मैं तो राम भरोसे
नन्ही-सी माटी की दियरी, जलती राम भरोसे
सुन री दियरी, कितने दीपक, पल में बुझाए मैंने
राजमहल के कंचन-दीवट, धूल मिलाए मैंने
ना सोने की, ना चाँदी की, गाँव-कुम्हार बनाई
जिस माटी से सिया जनमीं, मैं उस माटी की जाई
बादल गरजे, बिजली कड़की, काँप उठी लौ सारी
धीमे से बोली दियरी, राम, अब लाज तिहारी
झर-झर बरसे कारे बदरा, बुझ जा री अलबेली
सूरज तक को ढाँप लिया, तू तो एक अकेली
भीगी माटी, भीगी बाती, लौ है रघुबर की थाती
जिसने दी वो ही राखेगा, मैं काहे घबराती
जिस आँगन की देहरी पे मैं, उस आँगन की माई
चूल्हा ठंडा, अँखियाँ भीगीं, फिर भी राम सहाई
मोहे बाले, नाम पुकारे, आस न कबहूँ खोई
कितनी रात अँधेरी आई, राम भरोसे सोई
हार के पुरवइया जब ठहरी, देखी लौ ना डोली
आँचल की ओट लगा के बैठी, हौले से फिर बोली
राम भरोसे जो जलती है, उसको कौन बुझाए
राम-नाम की नन्ही-सी लौ, सारी रैन जगाए
🔔 Subscribe to Bhajan Ghat for a new original bhajan.
Original lyrics and music. Disclosed per YouTube policy.
#bhajan #diwali #ram #hindibhajan #bhajanghat