विश्वास है मुझमें नहीं कुछ कमी है Lyrics अभिलाषा बेन
आत्मन भक्ति धारा
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विश्वास है मुझमें नहीं कुछ कमी है Lyrics अभिलाषा बेन
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आत्मन भक्ति धारा
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विश्वास है मुझमें
नहीं कुछ कमी है
प्रभुवर के जैसी -
मुझमे प्रभुता भरी है।
अपने प्रभु की दृष्टि करे जो
अपने प्रभु मे ही बस को रमें जो
ज्ञान का दीपक जला कर तो देखो !
आनंद स्वरूप में जम कर तो देखो
हर पल लगेगी,
सुख की झड़ी है।
विश्वास है मुझमें
नहीं कुछ कमी है
प्रभुवर के जैसी -
मुझमे प्रभुता भरी है।
होता जगत परिणमन
सारा क्रम - क्रम
पर्यायों का खेल
होता है क्रम क्रम
कर्ता - धरता न है अब बनना
ज्ञाता बनकर आनंद में रहना
सर्वज्ञ प्रभु से ये श्रद्धा मिली है
विश्वास है मुझमें
नहीं कुछ कमी है
प्रभुवर के जैसी -
मुझमे प्रभुता भरी है।
वीतरागता ही उपादेय मानो
राग का कण भी
है हेय जानो
बहुत है फसाया मोह की रागनी ने
भ्रमाया बहुत
शुभ की लगनी ने
वीतरागी स्वभाव पे
अब दृष्टि पड़ी है।
विश्वास है मुझमें
नहीं कुछ कमी है
प्रभुवर के जैसी -
मुझमे प्रभुता भरी है।
ज्ञानियों ने भी
है बस जिसको ध्याया
वो शुद्धात्मा ही मेरे मन भाया
चैतन्य देव हु मैं जीवराया
सबसे सुन्दर सबसे न्यारा
अनंत वैभव मुझमें समाया
परमात्मा हु खबर अब पड़ी है।विश्वास है मुझमें
नहीं कुछ कमी है
प्रभुवर के जैसी -
मुझमे प्रभुता भरी है।
महाभाग्य से गुरु कहान को पाया
अनंत भवों का सोया पुण्य है जागा
मिथ्यात्व का सारा जहर है उतारा भगवान आत्मा का अमृत पिलाया जाग जा तुझमें अनंतो
शक्तिया ,,पड़ी है।
विश्वास है मुझमें
नहीं कुछ कमी है
प्रभुवर के जैसी -
मुझमे प्रभुता भरी है।