उठ जाग जा रे चेतन Lyrics अभिलाषा बेन
आत्मन भक्ति धारा
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उठ जाग जा रे चेतन Lyrics अभिलाषा बेन
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आत्मन भक्ति धारा
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[Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
[Verse 1]
सब कुछ तेरा है तुझमें,
इतना न तूने जाना
अपना रहा सदा जो
उसको पराया माना
कर ले स्वयं की दृष्टि
प्रभुता का तू खजाना
[Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
[Verse 2]
ये राग तो ज़हर है
पीना कभी न इसको
अज्ञानता से जन्मा
अपना न कहना इसको
अमृत भरा है तुझमें
पी ले, जो सुख है पाना
[Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
[Verse 3]
गुरु कहान ने हमें दी
शुद्धात्मा की बातें
कहते थे तू प्रभु है
पर्यायों पे न जाना
कम न कभी जो होगा
उस धन से तू भरा है
[Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
[Verse 4]
देखा जो अपने अंतर में
ज्ञान ही भरा है
आनंद से लबालब
साम्राज्य ये मेरा है
हूँ लीन सदा ही निज में
ये आज मैंने जाना
[Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
[Verse 5]
मेरे ज्ञान की ये दुनिया
बस ज्ञान से बनी है
बस मैं ही इसमें दिखता
ये जाना मै अभी है
ज्ञेयों की इस झलक में
ज्ञायक जना रहा है
[Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
[Verse 6]
मैं याद कैसे रखूँ निज को
अज्ञानी सोचता है
कैसे भूलाऊँ, खुद ही हूँ
ये ज्ञानी सोचता है
मैं ही विलसता हर क्षण
ये विश्वास बस है लाना
[Final Chorus]
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
गुरु देव की कृपा से
निज का मर्म में जाना
भुला अनादि से ही मै m
मेरा ही ठिकाना
अपने में ही रमकर
ऋण गुरुओ का चुकाना
उठ जाग जा रे चेतन,
अवसर ये जा रहा है
अपने को भूलकर क्यों
भव भव भ्रमा रहा है
जाग जाग जाग चेतन,,,,,,