गुरुणी का पुण्य स्मृति दिवस साध्वी श्री पियूष दर्शना जी महाराज का भजन
kamla choudhary
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गुरुणी का पुण्य स्मृति दिवस साध्वी श्री पियूष दर्शना जी महाराज का भजन
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पुण्य स्मृति में जब शब्द थमे… स्मृतियाँ बोलने लगीं..
आत्मलक्ष्मी मौन साधिका किरणप्रभाजी म. के पुण्य स्मृति दिवस पर स्मितभाषी श्री पियूषदर्शनाजी म. ने भजन के माध्यम से गुरुणी के प्रति अपने अंतर्मन के भाव अर्पित किए।
“तेरे ही दम से इस गुलशन में बहार थी… तेरे ही कदमों में रहमतें हजार थीं…”
इन पंक्तियों के साथ जैसे स्मृतियों का एक पूरा संसार खुलता चला गया। गुरु का सान्निध्य, चरणों की छाया और स्नेह की वह ऊष्मा सब कुछ एक-एक स्वर में फिर से जीवंत हो उठा..
“तेरे जाने से इस चमन का पत्ता-पत्ता उदास हो गया…”
यह केवल विरह की पंक्ति नहीं रही, बल्कि उस रिक्तता का स्पर्श बन गई जिसे शब्दों से अधिक हृदय समझता है। भजन आगे बढ़ता गया और भाव भीतर उतरते गए..
गुरुणीजी आज प्रत्यक्ष रूप में हमारे बीच नहीं हैं, पर उनकी पावन स्मृतियाँ, दिए हुए संस्कार, स्नेह और मौन व्यक्तित्व आज भी जीवन के भीतर अपनी उपस्थिति बनाए हुए हैं..
कुछ रिश्ते समय से नहीं मिटते…वे स्मृति बनकर और अधिक उजले हो जाते हैं।
देह भले दृष्टि से ओझल हो जाए,गुरु-स्पर्श जीवन से कभी दूर नहीं होता..
भावपूर्ण श्रध्दांजली..🙏✍️
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