परमवीर चक्र विजेता कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया जी का गाँव | जंगल | Punjab EP 06
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परमवीर चक्र विजेता कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया जी का गाँव | जंगल | Punjab EP 06
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Bharat Yatra Day 24
होशियारपुर से शुरू हुई हमारी भारत यात्रा में इस बार सफर हमें पंजाब के जंगल गाँव तक ले गया, जहाँ से जुड़े हैं परमवीर चक्र से सम्मानित वीर योद्धा कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया जी।
हम सुबह होशियारपुर के रैन बसेरे से निकलते हैं। रास्ते में हमारी स्कूटी पंचर हो जाती है, जिसे ठीक करवाकर हम आगे की यात्रा शुरू करते हैं। रास्ते में गुरुद्वारे में लंगर छकते हैं और फिर निकल पड़ते हैं जंगल गाँव की ओर।
रास्ते में हमारी मुलाकात ऐसे श्रद्धालु से होती है, जो बिजनौर से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए दंडवत यात्रा कर रहे हैं। उनकी कठिन यात्रा, आस्था और समर्पण देखकर मन में श्रद्धा जाग उठती है।
इसके बाद हम पहुँचते हैं पंजाब के जंगल गाँव, जहाँ कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया जी से जुड़ी यादें और उनका स्मारक देखने का अवसर मिलता है। हम स्कूल में स्थित उनके स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके जीवन तथा वीरता की कहानी को जानने की कोशिश करते हैं।
इसके बाद हमें उनके परिवार के एक सदस्य, उनके भतीजे करण सिंह सलारिया से मिलने का अवसर मिलता है। उनसे बातचीत के माध्यम से हम इस महान वीर के जीवन, परिवार और बलिदान से जुड़ी जानकारी जानने की कोशिश करते हैं।
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया कौन थे?
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया भारतीय सेना की 3/1 गोरखा राइफल्स के वीर अधिकारी थे। उनका जन्म 29 नवंबर 1935 को जमवाल गाँव में हुआ था, जो उस समय अविभाजित भारत में था और अब पाकिस्तान में स्थित है।
वर्ष 1961 में वे संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन के अंतर्गत कांगो में तैनात थे। 5 दिसंबर 1961 को एलिज़ाबेथविल (वर्तमान लुबुम्बाशी) में एक सैन्य कार्रवाई के दौरान उन्होंने अद्भुत साहस और नेतृत्व का परिचय दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे अपने सैनिकों का नेतृत्व करते हुए लड़ते रहे और अंततः देश तथा अपने कर्तव्य के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
उनकी असाधारण वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
उनकी कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा वीर वही है, जो कठिन से कठिन परिस्थिति में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटता।
जंगल गाँव से निकलने के बाद हम गुरदासपुर के एक गुरुद्वारे में रुकते हैं, जहाँ रात बिताने के बाद अगली सुबह अमृतसर की ओर अपनी भारत यात्रा आगे बढ़ाते हैं।
जय हिंद 🇮🇳
वंदे मातरम् 🇮🇳
भारत माता की जय 🇮🇳
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