जन्म कुंडली अध्ययन दूसरा विवाह, आपको ही चलाना होगा नही तो सुख नहीं है विवाह का sunday kundali
Pragya samany jyotish gyan
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जन्म कुंडली अध्ययन दूसरा विवाह, आपको ही चलाना होगा नही तो सुख नहीं है विवाह का sunday kundali
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#astrology #vedicastrology #aaj #viralvideo #shortvideo , आज हम आपको जानकारी दे रहे हैं कि विवाह करते समय कुंडली अध्ययन क्यों जरूरी होता हैं
विवाह के समय कुंडली मिलान ज्योतिष की परंपरा में इसलिए किया जाता है ताकि वर-वधू के बीच संभावित स्वभाव, मानसिक तालमेल, वैवाहिक जीवन और पारिवारिक अनुकूलता को समझने का प्रयास किया जा सके।
मुख्य रूप से देखा जाता है:
अष्टकूट गुण मिलान — कुल 36 गुणों में मिलान।
नाड़ी — स्वास्थ्य और संतान से जुड़े ज्योतिषीय संकेतों के लिए।
भकूट — दांपत्य और पारिवारिक सामंजस्य के संकेतों के लिए।
गण — स्वभाव और व्यवहार की अनुकूलता।
ग्रहों की स्थिति — सप्तम भाव, सप्तमेश, शुक्र, गुरु आदि से विवाह संबंधी संकेत।
दशा और गोचर — विवाह के समय और आगे के महत्वपूर्ण कालखंडों का आकलन।
लेकिन केवल 36 गुण देखकर विवाह का निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। पूरी कुंडली, दोनों व्यक्तियों का स्वभाव, आपसी समझ, परिवार, शिक्षा/करियर की अपेक्षाएँ और व्यक्तिगत सहमति भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। कुंडली मिलान को ज्योतिषीय मार्गदर्शन के रूप में देखना बेहतर है, निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं।