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अन्यत्व भावना | मृगापुत्र की प्रेरक कथा | बारह भावना – एपिसोड 16 | गुरु कृपा वाणी

Guru Krupa Vaani | गुरु कृपा वाणी

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अन्यत्व भावना | मृगापुत्र की प्रेरक कथा | बारह भावना – एपिसोड 16 | गुरु कृपा वाणी

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Guru Krupa Vaani | गुरु कृपा वाणी
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जय जिनेंद्र 🙏 गुरु कृपा वाणी के एपिसोड 16 में हम बारह भावनाओं की पाँचवीं भावना — अन्यत्व भावना — का चिंतन करेंगे। इस एपिसोड में सुनिए मृगापुत्र की प्रेरक कथा, जिसने संसार के आकर्षण के बीच एक मुनिराज के दर्शन से अपने पूर्वभव का स्मरण किया और संयम के मार्ग को अपनाया। अन्यत्व भावना हमें यह चिंतन कराती है कि आत्मा और संसार के समस्त पर-पदार्थ अलग हैं। धन, संपत्ति, परिवार, शरीर और सांसारिक संबंध हमारे वास्तविक स्वरूप नहीं हैं। इस भावना का मूल संदेश है— “जहाँ देह अपनी नहीं, तहाँ न अपना कोय। घर-संपत्ति प्रकट ये, पर हैं परिजन लोय॥” मृगापुत्र की कथा के माध्यम से समझिए कि कैसे जातिस्मरण ज्ञान, वैराग्य और आत्मचिंतन ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। 🌿 इस एपिसोड में: • अन्यत्व भावना का अर्थ • आत्मा और पर-पदार्थ की भिन्नता • मृगापुत्र का पूर्वभव स्मरण • संसार के आकर्षण से वैराग्य की ओर यात्रा • संयम और आत्मकल्याण का संदेश यदि यह कथा और चिंतन आपको अच्छा लगे, तो वीडियो को Like करें, Share करें और Guru Krupa Vaani को Subscribe करें। जय जिनेंद्र 🙏 #अन्यत्वभावना #मृगापुत्र #बारहभावना #जैनधर्म #जैनकथा #Jainism #GuruKrupaVaani #episode16