अंधकासुर: अंधकार से जन्मा दैत्य और उसकी मुक्ति की पौराणिक कथा
Sumit Kumar
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अंधकासुर: अंधकार से जन्मा दैत्य और उसकी मुक्ति की पौराणिक कथा
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Sumit Kumar
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जब माता पार्वती ने क्रीड़ा-वश भगवान शिव के नेत्र ढँक दिए, तो संपूर्ण ब्रह्मांड क्षण भर के लिए महा-अंधकार में डूब गया। उसी क्षण शिवजी के दिव्य स्वेद (पसीने) की बूंद से जन्मा अंधकासुर—एक ऐसा बालक जो जन्म से दृष्टिहीन था। दैत्यराज हिरण्याक्ष द्वारा पाला गया और ब्रह्मा जी के वरदान से अजेय बना यह असुर त्रिलोक पर अपना आधिपत्य जमा लेता है। किंतु अज्ञान और अंधे अहंकार में अंधकासुर कैलाश पर आक्रमण कर देता है। सुनिए अंधकासुर के अलौकिक जन्म, कैलाश के महासंग्राम और भगवान शिव के त्रिशूल से हुए उसके अंतिम उद्धार की यह अद्भुत और आध्यात्मिक कथा।
अंधकासुर की कथा केवल एक असुर की कहानी नहीं है, बल्कि यह अज्ञान (अविद्या) और अहंकार के विनाश की प्रतीक है। यह दर्शाती है कि भगवान शिव का दंड भी वास्तव में जीव के उद्धार और आध्यात्मिक पुनर्जन्म का एक माध्यम है।
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