सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का पौराणिक रहस्य: राहु-केतु की अमर गाथा
Sumit Kumar
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सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का पौराणिक रहस्य: राहु-केतु की अमर गाथा
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सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का पौराणिक रहस्य: राहु-केतु की अमर गाथा
क्या आप जानते हैं कि प्राचीन मान्यताओं के अनुसार आकाश में सूर्य और चंद्र ग्रहण क्यों घटित होते हैं? इस पॉडकास्ट एपिसोड में हम समुद्र मंथन की उस पौराणिक गाथा में गहराई से उतरेंगे, जहाँ स्वरभानु नामक असुर ने छल से अमृत की कुछ बूंदें पी ली थीं।
अमृत गले से नीचे उतरने से पहले ही भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत के स्पर्श के कारण उसका सिर 'राहु' और धड़ 'केतु' के रूप में अमर हो गए। सूर्यदेव और चंद्रदेव द्वारा भेद खोले जाने के कारण राहु और केतु आज भी उनसे प्रतिशोध रखते हैं और समय-समय पर उन्हें निगलने का प्रयास करते हैं, जिससे सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का दृश्य बनता है। जानिए इस पौराणिक रहस्य के पीछे की पूरी कहानी |